केदारनाथ में PM मोदी ने किया महा रुद्राभिषेक, राष्ट्र के कल्याण के लिए की प्रार्थना

केदारनाथ में पीएम मोदी ने आदि शंकराचार्य के प्रतिमा का किया अनावरण, बोले- एक समय था जब धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था

Updated: Nov 05, 2021, 01:03 PM IST

केदारनाथ में PM मोदी ने किया महा रुद्राभिषेक, राष्ट्र के कल्याण के लिए की प्रार्थना
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देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को उत्तराखंड में बाबा केदारनाथ का दर्शन करने पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भगवान का रुद्राभिषेक किया और राष्ट्र के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण भी किया। एक ही शिला को काटकर बनाई गई शंकराचार्य की बारह फुट लंबी प्रतिमा का अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री ने उसके समक्ष बैठकर उनकी आराधना की।

पीएम मोदी ने यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। लेकिन, भारतीय दर्शन तो मानव कल्याण की बात करता है, जीवन को पूर्णता के साथ, holistic way में देखता है। आदि शंकराचार्य जी ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया।' 

प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'अब हमारी सांस्कृतिक विरासतों को, आस्था के केन्द्रों को उसी गौरवभाव से देखा जा रहा है, जैसा देखा जाना चाहिए। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है, अयोध्या को उसका गौरव वापस मिल रहा है। अभी दो दिन पहले ही अयोध्या में दीपोत्सव का भव्य आयोजन पूरी दुनिया ने देखा। भारत का प्राचीन सांस्कृतिक स्वरूप कैसा रहा होगा, आज हम इसकी कल्पना कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि, 'शंकर का संस्कृत में अर्थ है- “शं करोति सः शंकरः” यानी, जो कल्याण करे, वही शंकर है। इस व्याकरण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष प्रमाणित कर दिया।उनका पूरा जीवन जितना असाधारण था, उतना ही वो जन-साधारण के कल्याण के लिए समर्पित थे। रामचरित मानस में कहा गया है- ‘अबिगत अकथ अपार, नेति-नेति नित निगम कह’ अर्थात्, कुछ अनुभव इतने अलौकिक, इतने अनंत होते हैं कि उन्हें शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। बाबा केदारनाथ की शरण में आकर मेरी अनुभूति ऐसी ही होती है।' 

बताया जा रहा है कि आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के करीब 18 मॉडल तैयार किए गए थे, जिनमें पीएम मोदी ने एक का चुनाव किया। मैसूर के शिल्पकार अरुण योगीराज और उनकी टीम ने इसे बनाया है। इसे करीब 130 टन वजनी शिला को तराशकर बनाया गया है और अब इसका वजन 35 टन के करीब है।