पति को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंची महिला, यूपी में स्वास्थ्य सुविधाओं की खुली पोल

यूपी के प्रतापगढ़ में सरकारी अस्पताल की घटना, CMO ने कहा, अस्पताल में सिर्फ 5 या 6 स्ट्रेचर, मरीज़ 500 आते हैं

Updated: Nov 12, 2020, 12:39 AM IST

पति को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंची महिला, यूपी में स्वास्थ्य सुविधाओं की खुली पोल
Photo Courtesy: Bhaskar

लखनऊ। लाख कोशिशों के बाद भी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा है। प्रतापगढ़ के सरकारी अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही और संसाधनों के अभाव में एक महिला अपने पति को कंधे पर टांग कर इलाज के लिए पहुंची। महिला का कहना है कि उसका पति बीमार है, जब वह इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए गई तो वहां कोई स्ट्रेचर नहीं दिया गया। कई लोगों से मदद की गुहार लगाई पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। जिससे हारकर महिला ने बीमार पति को कंधे पर टांग कर इलाज कराने पहुंच गई।

जब इस बारे में अस्पताल के सीएमओ से पूछा गया तो उन्होंने अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी का रोना रोकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना था कि अस्पताल में 5 या 6 स्ट्रेचर होते हैं जबकि मरीज 500 आते हैं। इतना ही नहीं महिला पर आरोप लगाते हुए सीएमओ ने कहा कि उसने किसी से मदद नहीं मांगी होगी। महिला और उसके पति की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

 आपको बता दें कि यह महिला अमेठी की रहने वाली है। इसका नाम शोभा है, पति-पत्नी प्रतापगढ़ में किराए के मकान में रहते हैं। कुछ दिनों से पति बीमार था। जिसके बाद वह पिछले शुक्रवार को अस्पताल में इलाज करवाने पहुंची। शोभा ने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर खोजा, लेकिन उसे किसी ने ना तो स्ट्रेचर दिया औऱ ना ही किसी तरह मदद की।  जिसके बाद वह अपने पति को पीठ पर लादकर वार्ड तक पहुंची।

शुक्रवार की इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जब सीएमओ पीपी पांडेय से बात की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर कम हैं, मरीज ज्यादा आते हैं। महिला को स्ट्रेचर के लिए इंतजार करना चाहिए था। अगर वह मदद मांगती तो उसे पति को लादकर नहीं आना पड़ता।

अपने स्टाफ का पक्ष लेते हुए उन्होंने काम की अधिकता होने की बात भी कही। गौरतलब है कि इस  अस्पताल के इमरजेंसी में दो वार्ड बॉय, एक फार्मासिस्ट के साथ ही एक स्वीपर की भी ड्यूटी होती है, ताकि मरीजों को आपात कालीन समय में मदद की जा सके। लेकिन किसी ने महिला की कोई मदद नहीं कि जिससे महिला को खुद अपने पति को लेकर वार्ड तक पहुंचना पड़ा।