ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी परियोजना में फर्जीवाड़ा, पशु चिकित्सक पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज
ग्वालियर नगर निगम की आवारा कुत्तों की नसबंदी परियोजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में एक पशु चिकित्सक पर दूसरे डॉक्टर के नाम से एफिडेविट जमा कर धोखाधड़ी करने का आरोप साबित हुआ।
ग्वालियर नगर निगम की आवारा कुत्तों की नसबंदी परियोजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि परियोजना से जुड़े एक पशु चिकित्सक द्वारा संदिग्ध और कूटरचित शपथपत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत कर नगर निगम को गुमराह किया गया। मामले की शिकायत और जांच के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने आरोपी पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान ने 12 जून 2026 को पड़ाव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में कथित फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया।
नगर निगम आयुक्त कार्यालय के अनुसार, साल 2022 में निगम क्षेत्र में घूमने वाले आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए छत्तीसगढ़ स्थित संस्था एनीमल केयर फाउंडेशन को अनुबंधित किया गया था। संस्था ने दावा किया था कि 1 मार्च 2022 से 30 अप्रैल 2022 के बीच कुल 656 स्ट्रीट डॉग्स का बंधियाकरण किया गया। इस संबंध में आवश्यक रिकॉर्ड भी निगम को सौंपा गया था।
अनुबंध की शर्तों के तहत नसबंदी के लिए पकड़े गए कुत्तों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी स्थान पर छोड़ना अनिवार्य होता है। जिसकी पुष्टि के लिए परियोजना से जुड़े पशु चिकित्सक को शपथ पत्र प्रस्तुत करना होता है। इसी शपथ पत्र को लेकर बाद में नगर निगम के पास शिकायत पहुंची। जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
आयुक्त के निर्देश पर संबंधित संस्था से स्पष्टीकरण मांगा गया। जांच के दौरान संस्था ने स्वीकार किया कि परियोजना अवधि में एबीसी सेंटर ग्वालियर में डॉ. रविरमन शर्मा पशु चिकित्सक के रूप में नियुक्त थे। संस्था के जवाब में बताया गया कि स्टाम्प पेपर डॉ. रविरमन शर्मा ने खरीदा था और उस पर उनके हस्ताक्षर भी थे। हालांकि, नगर निगम में जमा किए गए शपथ पत्र में चिकित्सक के रूप में डॉ. राघव पाराशर का नाम दर्ज पाया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, स्टाम्प पेपर खरीदने और हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति तथा शपथ पत्र में दर्ज नाम अलग-अलग होने से दस्तावेज की वैधता पर सवाल खड़े हुए। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि किसी अन्य चिकित्सक के नाम का उपयोग कर शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। जिससे नगर निगम प्रशासन को भ्रमित किया गया।
एडिशनल एसपी जयराज कुबेर ने बताया कि नगर निगम की शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोपी चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज तैयार करने और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में और कौन कौन लोग शामिल थे तथा कथित फर्जीवाड़े का उद्देश्य क्या था।




