पंक्चर सुधारने को मजबूर यूपी की गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर, खिलाड़ी को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

प्रियंका लोधी का सपना है कि वे देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतें, लेकिन गरीबी की वजह से वे कोचिंग नहीं कर पा रही हैं, सरकार से मदद की अपील की है,

Updated: Nov 15, 2021, 02:07 PM IST

पंक्चर सुधारने को मजबूर यूपी की गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर,  खिलाड़ी को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की प्रियंका लोधी नेशनल लेवल की बॉक्सर हैं, वे कई प्रतियोंगिताओं में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। प्रियंका कई गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। लेकिन अब उन्हें अपना घर चलाने के लिए लोगों की गाड़ियों का पंक्चर सुधारना पड़ रहा है। प्रियंका का सपना है कि वे ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करें, इसके लिए उन्हें बेहतर कोचिंग और मदद की जरूरत है, लेकिन इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी को यूपी सरकार की  किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, वे पंक्चर सुधारकर अपना परिवार चलाने को मजबूर हैं।

प्रियंका लोधी इसी साल अक्टूबर 2021 में बालिका सब जूनियर 50 किलो भार वर्ग में गोवा में आयोजित नेशनल बॉक्सिंग कंपटीशन में उत्तर प्रदेश की तरफ से प्रतिभाग किया था और तमिलनाडु की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। प्रियंका ने बताया कि मंडल और स्टेट लेवल पर भी उन्होंने कई मेडल जीते हैं। प्रियंका बुलंदशहर के कन्या इंटर कॉलेज की 11वीं की छात्रा हैं। वे पिता के साथ 12 साल की उम्र से ही पंक्चर बनाने का काम कर रही हैं। वहीं 14 साल की उम्र से उन्होंने बॉक्सिंग करना शुरु किया था। जिसके बाद उन्होंने मंडल और स्टेट लेवल पर कई मेडल्स अपने नाम किए। प्रियंका पर घर चलाने की जिम्मेदारी है, वे कभी टायरों के पंक्चर सुधारती हैं तो कभी रजाइयों में रुई भरती हैं, किसी कदर जीवनयापन करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि परिवार का खर्चा चलाने की जिम्मेदारी उन पर ही है। उनकी पांच बहनें हैं और एक भाई है।  

प्रियंका लोधी नेशनल सब जूनियर बॉक्सर खिलाड़ी हैं। कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की प्रियंका ने गोवा में आयोजित नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम कर यूपी का नाम रोशन किया था। बॉक्सर ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से परिवार की आर्थिक मदद और अपनी बॉक्सिंग की कोचिंग के लिए मदद भी मांगी है, लेकिन अब तक उनकी कोई सुनवाई होती नजर नहीं आ रही है।