खंडवा में प्रशासन की लापरवाही से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, खुले में रखा 4 हजार क्विंटल गेहूं सड़ा

खंडवा में 75 लाख रुपए कीमत का गेहूं बारिश में भीगा, साल भर से ओपन कैप में रखा था तीन जिलों का गेंहू, मामले में आरोप-प्रत्यारोप पर तुले जिम्मेदार अधिकारी, ना विपणन संघ भोपाल ने सुध ली औऱ ना समितियों ने किया उठाव

Updated: Aug 02, 2021, 12:10 PM IST

खंडवा में प्रशासन की लापरवाही से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी,  खुले में रखा 4 हजार क्विंटल गेहूं सड़ा
Photo courtesy: Patrika

खंडवा। प्रदेश में जहां एक तरफ लोगों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं, वहीं प्रशासन की लापरवाही से खंडवा में 4 हजार क्विंटल गेहूं बारिश की भेंट चढ़ गया। साल भर पहले यह गेहूं तीन जिलों खंडवा, उज्जैन और देवास से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। जिसे लाकर खंडवा जिले के नागचून और खालवा में ओपन कैप में रख दिया गया था। यहां खुले में रखने के बाद जिम्मेदार अफसरों ने गेहूं का उठाव नहीं करवाया और ना ही इसे लेने समितियां भी नहीं पहुंची। अफसरों और समितियों की लापरवाही की वजह से 75 लाख रुपए कीमत का गेहूं अंकुरित हो कर सड़ गया है। किसानों को इस गेहूं के लिए करीब 75 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। 

इस गेहूं की खरीदी 2019-20 में की गई थी। दरअसल उज्जैन, देवास और शाजापुर जिले से उनदिनों गेहूं की बंपर खरीदी समर्थन मूल्य पर हुई थी। इन जिलों में इतनी मात्रा में गेहूं स्टोरेज का इंतजाम नहीं होने की वजह से उसे खंडवा जिले के नागचून और खालवा भेज दिया गया था। खंडवा में 28 हजार क्विंटल गेहूं और खालवा में 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं स्टोर किया गया था। इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं खराब होने की खबर के बाद अब आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है। जिम्मेदार अधिकारी दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आ रहे हैं।

ओपन कैप प्रभारी अधिकारी की मानें तो केवल 2800 क्विंटल गेंहूं खंडवा जिले का है, बाकि अन्य जिलों का है। सफाई देते हुए अफसर का कहना है कि वे साल भर से गेहूं का रखरखाव कर रहे हैं। उनकी ओर से गेहूं के उठाव के लिए विपणन संघ भोपाल को साल भर से पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं ली। अफसर अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है, वे पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी की पूर्ति समझ लेते हैं। ना तो मप्र विपणन संघ ने गेहूं के सुरक्षित स्टोरेज का इंतजाम किया और ना ही खंडवा के अधिकारियों ने इसकी सुध ली, विभागों की गलती से लाखों गरीबों की भूख शांत करने वाला गेहूं बारिश की भेंट चढ़ गया। जहां  कोरोना काल में लोगों के पास रोजगार नहीं होने से खाने के लाले पड़े हैं, वहीं सरकार भी लोगों को दिवाली तक मुफ्त अनाज देने की योजना संचालित कर रही है। इस गेहूं की बरबादी से सरकार और गरीबों दोनों को नुकसान उठाना पड़ा है।

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वहीं खंडवा के अलावा सिवनी जिले में भी करोड़ों की लागत से खरीदा गया अनाज बारिश में भीगकर सड़ने की कगार पर है। सिवनी में भी ओपन कैपों में लाखों क्विंटल गेहूं और धान रखा है, जिसे खरीदी वर्ष की प्राथमिकता के आधार पर उठाव किया जा रहा है। सिवनी के जिम्मेदारों का कहना है कि बारदानों की कमी की वजह से अनाज का उठाव नहीं हुआ है।