Soybean Crop Loss: सोयाबीन में तना छेदक इल्ली,पत्ते पीले, अफलन, किसान परेशान

Soya Pradesh MP: सोया प्रदेश कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में सोयाबीन फसल के पत्ते पीले पड़े, फल नहीं लगने से किसान बेहाल

Updated: Sep 01, 2020 03:06 PM IST

Soybean Crop Loss: सोयाबीन में तना छेदक इल्ली,पत्ते पीले, अफलन, किसान परेशान
Photo Courtesy: Patrika

भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर, नसरुल्लागंज, मालवा, निमाड और भोपाल के आसपास समेत प्रदेश के कई अन्य इलाकों में सोयाबीन की फसल चौपट होने की कगार पर है। सोयाबीन की फसल में येलो मोजेक, सफेद कीट सहित अन्य बीमारियों के कीटों की वजह से फलियां ही नहीं लग रही हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के नसरुल्लागंज में किसानों की सोयाबीन की फसल में बीमारी लग गई है। किसानों की फसल अचानक से पीली पड़ने लगी हैं। सोयाबीन की फसल में फल नहीं बन रहा है।, उसके तनों के भीतर इल्लियां पड़ गई हैं। जो बाहर से तो नहीं दिखाई देती लेकिन तने को चीरकर इन इल्लियों को देखा जा सकता है। 

सोयाबीन की फसल पर येलो मोजेक वायरस ने हमला बोल दिया है। किसानों की पूरी फसल इस वायरस की चपेट में आ गई है। अधिकांश जगह सोयाबीन के पत्ते पीले पड़ गए और पौधे सूख चुके हैं। कई स्थानों पर इस यलो मोजेक वायरस की वजह से पौधों में अफलन की समस्या पैदा हो गई है। अर्थात पौधों में फली नहीं लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रदेश के मालवा, निमाड़, महाकोशल समेत अन्य इलाकों में किसानों की करीब 25 प्रतिशत तक फसल के नुकसान होने की आशंका है। वहीं नरसिंहपुर में 40, दमोह में 10, सिवनी में पांच फीसदी तक नुकसान की बात कही जा रही है। प्रदेश में इस बार कुल 141 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा में खरीफ फसलों की बोवनी की गई है।

बारिश में देरी से फसल मे लगे कीड़े

दरअसल इस साल वर्षा में लंबा अंतराल रहा सावन का महीना सूखा निकल गया और इसी दौरान तापमान अधिक था जिससे सोयाबीन की फसल में कीड़े लग गए हैं।  भोपाल के पास बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के गांव तारा सेवनिया और बगोनिया में किसानों की सोयाबीन की 100 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो चुकी है। यहां सोयाबीन में दाने नहीं आए हैं। येलो मोजेक वायरस का असर सोयाबीन में बड़े पैमाने पर नजर आ रहा है। 

सोयाबीन फसल बिगड़ी

तना छेदक कीटों ने भी किसानों को किया परेशान

अमेरिका में नेब्रास्का स्थित कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन संस्थान के अनुसार Soybean Stem Borer Insects के वयस्क टिड्डे जून से अगस्त तक खेतों में मौजूद होते हैं। पत्तियों और तने को जोड़ने वाले डंठल में मादा अंडे देती है। और जब अंडे से लार्वा निकलता है तो वह फसल के तने में छेद कर देता है। और डंठल में घुस जाता है। और pith जहां पौधा अपना पोषक तत्व संग्रहित और परिवहित करते हैं और उसे नष्ट करने लगते हैं। यह लार्वा हल्के क्रीम कलर का होता है। बड़े होने पर इन कीटों की लंबाई करीब पौन इंच तक हो जाती है। बड़ा होने पर यह कीट पौधे की जड़ की तरफ बढ़ता है और उसे खोखला करना शुरु कर देता है। यह तने में स्थान बना लेता है जिसमें वह ठंड का मौसम गुजार सके, लार्वा द्वारा बनाए इस चैंबर की वजह से पौधे का विकास रुक जाता है, और फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। यह लार्वा सर्दी में टिड्डा बनकर बाहर आ जाता है।

यदि संक्रमित तने को खोला जाए तो उसमें टेढ़ी-मेढ़ी लाल सुंरगे, मेंगट, प्यूपा देखे जा सकते है। यह तने की बाहरी परत पर पलते है और जड़ों तक को खा सकते हैं, जिससे पौधा मर जाता है। सोयबीन में फूल और फली बनने की अवस्था में यह कीट आक्रमण करता है। सबसे पहले यह बीमारी अमेरिका में पाई गई थी। इस कीट ने साल 1970 के दशक से 2007 तक सक्रिय था। इसने अमेरिका में करीब 40-50 प्रतिशत सोयाबीन की फसल को हानि पहुंचाई थी।

तना छेदक इल्लियों पर कीटनाशक नहीं होता कारगर

इसमें किसी किटनाशक का प्रभाव नहीं पड़ता क्यों कि इसका लार्वा पौधे के तने के अंदर पाया जाता है। व्यस्क डिड्डे पर ही कीटनाशक का असर होता है। पर वह लंबी अवधि के लिए पौधों पर पाया जाता है, यह बहुत महंगा पड़ता है। इससे कीट से बचने के लिए संक्रमित फसल वाले हिस्से को जल्द से जल्द काट देना चाहिए।

सोयाबीन फसल बिगड़ी

फसल रोटेशन से किसानों को मिल सकती है राहत

इस संक्रमण से बचने के लिए फसल रोटेशन का प्रयोग करना चाहिए, सोयाबीन के बाद किसी अन्य फसल को लगाया जाए ताकि इस कीट से संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। इन कीटों से बचने के लिए खेत के चारों ओर सूरजमुखी जैसे बड़े तने के पौधे रोंपे क्योंकि यह टिड्डा बड़े तने वाले खरपतवार प्रजातियों की ओर आकर्षित किया जा सकता है। किसानों को ज्यादा समयावधि वाली किस्म की फसल लेने की कोशिश करने की सलाह भी दी जाती है।

किसानों को मुआवजे की आस

सोयाबीन की फसल चौपट होने से किसानों में निराशा है। एक तरफ कोरोना दूसरी तरफ फसल चौपट हो गई है। अब तक किसानों को किसी तरह की कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है औऱ ना ही उनकी फसलों का सर्वे ही हो पाया है ऐसे में प्रदेश का किसान जल्द से जल्द मुआवजे और फसल बीमा की राशि की मांग कर रहा है।