ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ पर कनाडा का पलटवार, US पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान
अमेरिका-कनाडा ट्रेड विवाद अब टैरिफ वॉर में बदल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसे हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया।
अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता ट्रेड विवाद अब खुली टैरिफ जंग में बदलता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। तीन दिन तक वॉशिंगटन डीसी में चली व्यापार वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंची। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के कदम को हमला बताते हुए कहा कि हम जंग में हैं क्योंकि हम पर हमला हुआ है।
कार्नी ने साफ किया कि कनाडा अमेरिकी दबाव में ऐसी ट्रेड डील स्वीकार नहीं करेगा जिससे उसके राष्ट्रीय हित और संप्रभुता प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि बातचीत के अंतिम चरण में अमेरिका ने ऐसी शर्तें रखी जिन्हें कनाडा के लिए मानना संभव नहीं था। अब कनाडा अपने व्यापारिक रिश्तों को दूसरे देशों के साथ मजबूत करने और अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कनाडाई प्रधानमंत्री के मुताबिक, अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा कनाडा भी उसके सामान पर उतना ही जवाबी शुल्क लगाएगा। कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है जो 8 सितंबर से प्रभावी होगा।
अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन डीसी में लगातार तीन दिनों तक ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई थी। दोनों पक्षों ने समझौते की कोशिश की लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। बातचीत विफल होने के बाद ट्रंप ने शनिवार आधी रात से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया।
यह शुल्क कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का लगभग 5 प्रतिशत है। इससे पहले अमेरिका ने नए टैरिफ को 20 अगस्त से लागू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अंतिम समय में दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता चुना और ट्रंप ने समझौते के लिए समयसीमा तीन दिन बढ़ा दी थी। इसके बावजूद वार्ता सफल नहीं हो सकी।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों को बराबरी का अवसर नहीं देती। दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल, डेयरी उत्पाद, शराब और सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी के कारोबार को लेकर लंबे समय से मतभेद हैं।
अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपने बाजार को अमेरिकी कारों और दूसरे उत्पादों के लिए ज्यादा खोले। इसके जवाब में कनाडा ने अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत देने की मांग की थी लेकिन अमेरिका इन शुल्कों को हटाने के लिए तैयार नहीं हुआ।
कनाडा अपने डेयरी उद्योग को विदेशी कंपनियों और कम कीमत वाले आयात से बचाने के लिए कई तरह के नियम लागू करता है। अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों को कनाडाई बाजार में ज्यादा आसानी से प्रवेश मिले। हालांकि, कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर बड़ी रियायत देने को तैयार नहीं हुआ। इस वजह से दोनों देशों के बीच बातचीत में यह मुद्दा भी अटका रहा।
कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री पर लागू प्रतिबंधों को लेकर भी अमेरिका नाराज है। अमेरिकी पक्ष इसे अपने उत्पादों के साथ भेदभाव के रूप में देखता है और चाहता है कि अमेरिकी शराब को कनाडा में ज्यादा आसानी से बेचने की अनुमति मिले।
इसके अलावा कनाडा से अमेरिका जाने वाली सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी दोनों देशों में पुराना विवाद है। अमेरिका कनाडाई लकड़ी पर पहले से ही अलग-अलग व्यापारिक शुल्क और प्रतिबंध लगाता रहा है।
ट्रेड डील विफल होने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर कनाडा की आलोचना की। USTR ने कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ साझेदारी मजबूत करने का एक बड़ा अवसर गंवा दिया। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर की तुलना में बेहतर प्रस्ताव दिया गया था लेकिन उसकी नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने के कारण समझौता नहीं हो सका।
अमेरिका के मुताबिक, अगर डील हो जाती तो एयरोस्पेस क्षेत्र की सप्लाई चेन में बेहतर तालमेल, अनुचित व्यापार गतिविधियों से निपटने के उपाय और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग जैसे फैसले लिए जा सकते थे। इसके साथ ही USMCA यानी US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट पर आगे की बातचीत की घोषणा भी संभव थी।
अब दोनों देशों के बीच टैरिफ बढ़ने के साथ व्यापारिक तनाव और गहराने की आशंका है। कनाडा जहां अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने की बात कर रहा है वहीं अमेरिका कनाडा की व्यापार नीतियों में बदलाव के लिए दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जवाबी टैरिफ और नई बातचीत पर दुनिया की नजर रहेगी।




