ट्रंप की चेतावनी के बाद कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड चार साल में सबसे महंगा, 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची कीमतें

ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 126.31 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

Updated: Apr 30, 2026, 12:39 PM IST

दुनियाभर में एक बार फिर तेल की कीमतों ने आग पकड़ ली है और इसका सबसे बड़ा कारण है अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। तेल की कीमतें 4 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी अभी महीनों तक चल सकती है।

ट्रंप का मानना है कि ईरान परमाणु समझौते को लेकर ईमानदारी से बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स से कहा है कि इस घेराबंदी को तब तक जारी रखें जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए मजबूर न हो जाए। ईरान और अमेरिका के बीच इस तनातनी का सबसे बुरा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है।

दुनिया के कुल तेल और गैस सप्लाई का पांचवां हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जिस पर संकट मंडरा रहा है। इसी डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 108 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो इसका असर अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर दिखने लगेगा। फेडरल रिजर्व के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था को संभालना है। फेड ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के बीच स्थिर रखा है, लेकिन मीटिंग में सदस्यों के बीच काफी मतभेद दिखे। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने माना कि तेल की ऊंची कीमतों की वजह से महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.5% हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पेट्रोल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी, क्योंकि उनकी जेब से पैसा ईंधन पर ज्यादा खर्च होगा।

BBC के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आज ईरान के खिलाफ हमले से जुड़ी ब्रीफिंग दी जाएगी। सेंटकॉम ने ईरान के खिलाफ ‘छोटे लेकिन बहुत ताकतवर हमलों’ की प्लानिंग तैयार की है। इसका मकसद सीधे युद्ध को लंबा खींचना नहीं, बल्कि ईरान पर दबाव बनाना है ताकि वह बातचीत में झुक जाए। इसी खबर के बाहर आने के बाद तेल की कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि अगला पड़ाव 140 डॉलर होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को उनके लोग बेकार सलाह दे रहे हैं।