ईरान को एक रात में खत्म कर सकते हैं, वो रात कल भी हो सकती है: डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग अच्छी चल रही है। अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक रात में खत्म कर सकता है। जरूरत पड़ी तो वह रात कल भी हो सकती है।

Updated: Apr 07, 2026, 03:16 PM IST

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध लंबा खींचता जा रहा है। तमाम कोशिशों के बावजूद कोई भी देश सीजफायर के लिए तैयार नहीं है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जंग को लेकर सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग अच्छी चल रही है। अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक रात में खत्म कर सकता है। जरूरत पड़ी तो वह रात कल भी हो सकती है।

ट्रम्प ने यहां तक कहा, 'हमारे पास ऐसी प्लानिंग है कि कल रात 12 बजे तक (भारतीय समय के मुताबिक बुधवार सुबह 5:30 बजे) ईरान का हर पुल तोड़ दिया जाएगा और हर पावर प्लांट जला दिया जाएगा। पूरी तरह तबाही होगी।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से सुरक्षित निकाले गए पायलट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां उस शख्स की तलाश कर रही हैं, जिसने यह जानकारी लीक की कि पहले पायलट के बचाव के बाद दूसरा पायलट भी ईरान में फंसा हुआ है।

ट्रम्प के मुताबिक पहले ईरान को दूसरे पायलट के ईरान में फंसे होने की जानकारी नहीं थी, लेकिन खबर लीक होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन और मुश्किल हो गया। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस इंसान ने मीडिया में ईरान में फंसे दूसरे पायलट के बारे में खबर लीक की है उसे ढूंढा जाएगा। जरूरत पड़ी तो मीडिया कंपनी पर भी कार्रवाई हो सकती है। ट्रम्प ने माना कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया था, लेकिन यह दुश्मन की किस्मत थी यानी ये सिर्फ एक लकी हिट थी।

ट्रम्प ने ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट को बचाने वाले ऑपरेशन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, 'मैंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया था कि हमारे बहादुर सैनिकों को सुरक्षित घर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह किया जाए।' उन्होंने कहा, ‘यह बहुत जोखिम भरा फैसला था, क्योंकि हमने 1-2 पायलट को निकालने के लिए 100 जान को दांव पर लगा दिया था।’ ट्रम्प ने इसे हाल के दशकों में सबसे खतरनाक ऑपरेशनों में से एक बताया।

ट्रम्प ने यह भी बताया कि दोनों पायलट को बचाने के लिए दो रेस्क्यू मिशन किए गए। पहले मिशन में 21 अमेरिकी सैन्य विमान लगाए गए थे। जबकि दूसरे रेस्क्यू मिशन में कुल 155 अमेरिकी विमान शामिल थे। इनमें 4 बॉम्बर विमान, 64 फाइटर जेट, 48 ईंधन भरने वाले टैंकर विमान और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे। ट्रम्प के मुताबिक ये सभी कई घंटों तक ईरान के ऊपर ऑपरेशन करते रहे, कुछ समय तो दिन के उजाले में भी। इस मिशन में धोखे की रणनीति (डिकॉय) का भी इस्तेमाल किया गया। कई विमानों को अलग-अलग रास्तों पर भेजा गया ताकि दुश्मन भ्रमित हो जाए। ट्रम्प ने कहा कि हमने सात अलग-अलग जगहों पर ऐसा माहौल बनाया, जहां उन्हें लगा कि हम अपने सैनिक को ढूंढ रहे हैं।