इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 26वीं मौत, 63 वर्षीय बुजुर्ग ने इलाज के दौरान तोड़ा दम
इंदौर में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी के कारण मौतों की संख्या 26 हो गई है। शुक्रवार को 63 साल के बद्री प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित जल से मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। शुक्रवार 23 जनवरी को 63 साल के बद्री प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसी के साथ दूषित पानी की वजह से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 26 हो गई है। बद्री प्रसाद को बीते 17 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि वह पहले से टीबी के मरीज थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हालात अभी पूरी तरह काबू में नहीं हैं। इस समय अरबिंदो अस्पताल में 10 मरीज भर्ती हैं। जिनमें एक मरीज वेंटिलेटर पर है। भर्ती मरीजों में से 8 लोग पहले से दूसरी गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित हैं जिससे उनके इलाज में डॉक्टरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इलाके में पुरानी और टूटी हुई पानी की पाइपलाइन से गंदा पानी सप्लाई होने के कारण यह समस्या फैली थी। इसी वजह से भागीरथपुरा में बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी, दस्त और पेट की गंभीर बीमारियां हुई। हालात को देखते हुए लोग अब भी नल का पानी पीने से डर रहे हैं और ज्यादातर परिवार आरओ या टैंकर के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रशासन ने बताया कि इलाके के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में मरम्मत के बाद एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है। इस हिस्से में दो साल पहले नई मुख्य पाइपलाइन डाली गई थी इसलिए वहां लीकेज की दोबारा जांच कर पानी छोड़ा गया है। बाकी 70 प्रतिशत इलाके में नई मेन पाइपलाइन डालने का काम चल रहा है जिसे जनवरी के अंत तक पूरा करने का दावा किया गया है।
जब तक पाइपलाइन का काम पूरा नहीं होता तब तक नगर निगम रोजाना 50 से ज्यादा टैंकर से पानी पहुंचा रहा है। जहां खुदाई का काम चल रहा है वहां टैंकर गलियों के पास तक लगाए जा रहे हैं ताकि लोगों को दूर न जाना पड़े।
इस मामले में प्रशासन के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआत में केवल 4 मौत हुई थी। फिर यह संख्या बढ़कर 6 हुई। बाद में हाई कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में 21 मामलों में से 15 लोगों के मौत की पुष्टि हुई। अब बद्री प्रसाद की मौत के बाद कुलसंख्या 26 हो चुकी है। वहीं, अब तक इसकी वजह से कुल 436 लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इस मामले में अगली रिपोर्ट 27 जनवरी को हाई कोर्ट में पेश की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के अनुसार, अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज लगातार जारी है। कुछ मरीज किडनी, लिवर, दिमाग और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। जबकि, कुछ मरीजों की हालत में सुधार है और उन्हें जल्द डिस्चार्ज किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि हालात सामान्य होने तक पानी की जांच और मेडिकल निगरानी जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद स्थिति सुधरेगी लेकिन फिलहाल भागीरथपुरा के लोगों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है।




