रीवा-मऊगंज में करोड़ों का डामर घोटाला, फर्जी इनवॉइस लगाकर 18.59 करोड़ निकाले, 44 लोगों पर FIR

रीवा और मऊगंज में डामर घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। EOW जांच में सामने आया कि घटिया सामग्री लगाकर IOCL के नाम पर फर्जी बिल बनाकर 18.59 करोड़ रुपये निकाले गए।

Updated: Apr 11, 2026, 11:56 AM IST

मध्य प्रदेश के रीवा और मऊगंज जिलों में सड़क निर्माण से जुड़ा बड़ा डामर घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा की जांच में खुलासा हुआ है कि मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) के तहत घटिया गुणवत्ता का डामर इस्तेमाल कर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये का भुगतान लिया गया। इस मामले में कुल 44 लोगों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया गया है। इनमें रीवा के 27 और मऊगंज के 17 आरोपी शामिल हैं।

जांच के मुताबिक, साल 2017 से 2021 के बीच अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल हुआ था। रीवा परियोजना इकाई में फर्जी इनवॉइस के जरिए 12.71 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया था। जबकि, मऊगंज इकाई में इसी तरह 5.88 करोड़ रुपये की राशि निकाली गई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों को दरकिनार कर घटिया डामर का उपयोग किया गया और बाद में इंडियन ऑयल के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की हेराफेरी की गई।

EOW की कार्रवाई में सामने आया कि इस घोटाले में विभागीय अधिकारियों और संविदाकारों का गठजोड़ सक्रिय था। मामले में रामकुमार तिवारी, जुगल किशोर गुप्ता, ए.के. सिंह और अमित कुमार गुप्ता समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।