भोपाल नगर निगम ने अशोका गार्डन इलाके में 4 मंजिला भवन ढहाया, कांग्रेस ने लगाए दबाव में कार्रवाई करने के आरोप
भोपाल के अशोका गार्डन स्थित मंडी चौराहा क्षेत्र में नगर निगम ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने चार मंजिला भवन के अवैध हिस्सों को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया।
भोपाल। राजधानी भोपाल के अशोका गार्डन स्थित मंडी चौराहा क्षेत्र में मंगलवार को नगर निगम ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत किए गए निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक चार मंजिला भवन के कई हिस्सों को ध्वस्त कर दिया। भवन अनुज्ञा शाखा के निर्देश पर सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई कार्रवाई शाम साढ़े छह बजे तक चली थी। इस दौरान निगम के अतिक्रमण अमले ने भवन के अलग-अलग हिस्सों में तोड़फोड़ की। मौके पर कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया।
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान भवन में कई गंभीर निर्माण संबंधी अनियमितताएं सामने आई थी। भवन के बेसमेंट, मार्जिन ओपन स्पेस (एमओएस), चौथी मंजिल और छत पर स्वीकृत अनुमति से अलग अतिरिक्त निर्माण किया गया था। इसी आधार पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई को लेकर नरेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी मनोज शुक्ला ने नगर निगम पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान इसी भवन में उनका चुनाव कार्यालय संचालित किया गया था। इसलिए इसे जानबूझकर निशाना बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री विश्वास सारंग के निर्देश पर पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्रवाई कराई गई।
मनोज शुक्ला का दावा है कि भवन मालिक ने मुख्य नगर निवेशक के समक्ष अपना पक्ष पहले ही रख दिया था। साथ ही भवन के आपत्तिजनक हिस्से को स्वयं हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। जिसके फोटो और वीडियो संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद नगर निगम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया।
वहीं, नगर निगम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही की गई। निगम के मुख्य नगर निवेशक नीरज आनंद लिखार के अनुसार, भवन मालिक को नियमानुसार नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर दिया गया था। उन्होंने बताया कि भवन में किया गया निर्माण ऐसा था जिसे नियमों के तहत कम्पाउंड भी नहीं किया जा सकता था। ऐसा इसलिए क्योंकि आवश्यक खुली जगह उपलब्ध नहीं थी। सभी निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही अवैध हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई। मामले को लेकर फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।




