शिक्षक भर्ती में देरी पर फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा, भोपाल में DPI कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
मध्यप्रदेश में 10,700 चयनित शिक्षकों ने नियुक्ति की मांग को लेकर भोपाल के DPI दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सितंबर 2025 में चयन सूची जारी होने के बावजूद अब तक जॉइनिंग नहीं मिली है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी अब बड़े आंदोलन का रूप लेती जा रही है। नियुक्ति आदेश जारी न होने से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने बुधवार को भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बाहर प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार से भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग उठाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन सूची जारी हुए करीब नौ महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक न तो चॉइस फिलिंग शुरू हुई है और न ही जॉइनिंग की कोई स्पष्ट तारीख घोषित की गई है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत साल 2022 में हुई थी। इसके तहत 2023 में पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। जबकि, चयन परीक्षा अप्रैल 2025 में कराई गई। लंबी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2025 में परिणाम घोषित कर लगभग 10,700 उम्मीदवारों की चयन सूची जारी कर दी गई लेकिन इसके बाद से प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी है।
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प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका की धारा 3.28 के मुताबिक, चयन सूची जारी होने के तीन महीने के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य है। इसके बावजूद आठ से नौ महीने गुजर जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उम्मीदवारों का आरोप है कि अब तक पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तक जारी नहीं की गई है।
अभ्यर्थियों ने बताया कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया गया। हर बार जल्द प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन मिला लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई। मार्च में चॉइस फिलिंग और अप्रैल में जॉइनिंग शुरू कराने की बात कही गई थी लेकिन समय बीतने के बाद भी पोर्टल पर कोई अपडेट दिखाई नहीं दिया।
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इस देरी से प्रभावित करीब 10,700 चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। बावजूद इसके नियुक्तियां लंबित हैं। उनका सवाल है कि जब प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है तो भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में 1,895 ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं, 29,116 स्कूलों में लगभग 99,682 शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण इलाकों में हालात और अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं। वहां करीब 30 प्रतिशत पद अब भी खाली हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी कमी के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया लंबित रखना शिक्षा व्यवस्था पर भी असर डाल रहा है।
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छतरपुर के अभ्यर्थी विवेक तिवारी ने कहा कि हजारों युवा कई सालों से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। भर्ती में लगातार देरी के कारण अनेक उम्मीदवारों की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ अभ्यर्थियों के परिवार इलाज के अभाव में परेशान हैं। जबकि, कुछ ऐसे भी हैं जिनके परिजन नियुक्ति की प्रतीक्षा करते-करते दुनिया छोड़ चुके हैं।
विवेक ने यह भी कहा कि कई उम्मीदवार अब 40 साल की आयु पार कर चुके हैं। जिसकी वजह से उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि नौकरी में देरी का असर युवाओं के निजी जीवन, विवाह और परिवार बसाने जैसे फैसलों पर भी पड़ रहा है।
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अभ्यर्थी धीरेंद्र चौरसिया ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी सभी प्रमुख औपचारिकताएं जैसे परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अन्य चरण पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद अंतिम नियुक्ति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी कई बार भोपाल पहुंचकर प्रदर्शन कर चुके हैं और हर बार जल्द कार्रवाई का भरोसा मिला लेकिन अब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।




