जिसके लिए चाँद सितारे तोड़ने थे उसे सीने से लगा पिता ने दी जान, बेटी सहित सिविल इंजीनियर कुएँ में कूदा

रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर का बेटा राहुल इसलिए आत्महत्या करने को मजबूर हुआ क्योंकि उसे उसकी योग्यता के मुताबिक़ काम नहीं मिल पाया, कोरोना काल में नौकरी जाने के बाद कमाई की सारी कोशिशें हुई बेकार

Updated: Sep 22, 2022, 02:52 PM IST

जिसके लिए चाँद सितारे तोड़ने थे उसे सीने से लगा पिता ने दी जान, बेटी सहित सिविल इंजीनियर कुएँ में कूदा

खंडवा। मध्य प्रदेश में तीस साल के एक पढ़े-लिखे इंजीनियर युवक की आत्महत्या ने सिस्टम पर फिर सवाल खड़ा कर दिया है। खंडवा के रहनेवाले राहुल ने दुखी होकर न सिर्फ खुद की बल्कि अपनी जान से प्यारी बच्ची को भी अपने साथ जीवन समाप्त कर दिया। राहुल सोलंकी के पास सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री थी और वो कई सालों से नौकरी की तलाश में भटकते हुए कुंठा में जी रहा था। कुएं में कूदने से पहले उसने गमछे से अपनी बेटी को सीने से बांध लिया और जल समाधि ले ली।

हालांकि राहुल एक अच्छे परिवार से था और उसके पिता नरेंद्र सोलंकी रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर हैं। राहुल ने अच्छी पढ़ाई भी की और शुरूआत में उसकी नौकरी भी अच्छी फर्म में लगी। लेकिन कोरोना काल में उसकी नौकरी चली गई और फिर वो संभलने की जितनी भी कोशिश करता  रहा उसमें सफलता नहीं मिली। राहुल ने इलेक्ट्रानिक्स की दुकान खोली, राहुल ने अपनी क्षमता से कमतर नौकरी की, उसने कंप्यूटर ऑपरेटर बनकर भी जीविका चलाने की कोशिश की। लेकिन शायद इन हालातों से समझौता नहीं कर सका और जान दे दी।

पुलिस के मुताबिक राहुल का शव रतागढ़ के जिस कुएं से मिला, उसमें पिता के साथ गमछे में लिपटी उसकी तीन साल की बच्ची भी सीने से लगी थी। वह मंगलवार शाम से लापता था। मौत से पहले उसने पिता और पत्नी को मैसेज किया था कि अब कभी घर लौटकर नहीं आउंगा। परिवारवाले इस संदेश से परेशान उसे इधर- उधर ढ़ूंढ़ रहे थे कि पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे रतागढ़ के पास खेत में बने कुएं से ढ़ूंढ़ निकाला। जब शव बाहर निकाला गया तो राहुल के साथ उसकी तीन साल की बेटी सिया भी सीने से चिपकी थी।

एक इंजीनियर की ऐसी मौत देखकर इलाके के लोग दुखी हैं। राहुल अपनी अच्छी पढ़ाई और अच्छे खाते पीते परिवार होने के बावजूद खुद को संभाल नहीं सका और डिप्रेशन का शिकार हो गया। मध्य प्रदेश में हाल में पढ़े लिखे नौजवानों में अपने परिवार के साथ मौत को गले लगाने की अनेक वारदातें हो चुकी हैं। सबका आधार आर्थिक तंगी ही रहा है। 

हाल में में आयी सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश में छायी बेरोजगारी में मध्य प्रदेश का आंकड़ा 2.6 फीसदी है। हालांकि जानकार इस आंकड़े पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि ऐसी वारदातें आंकड़ों की पोल खुद ही खोल रही हैं।