इंदौर में दूषित पानी का कहर, 27 मौतों के बाद सड़क पर उतरे परिजन, शव रखकर किया चक्काजाम

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतें जारी हैं। शुक्रवार को 82 वर्षीय विद्याबाई यादव और 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की मौत के बाद आंकड़ा 27 पहुंचा। परिजनों ने शव रखकर चक्काजाम किया।

Updated: Jan 24, 2026, 04:05 PM IST

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी एक बड़ा संकट बन चुका है। शुक्रवार को एक महिला और एक पुरुष की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद इस मामले से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़कर 27 तक पहुंच गई है। लगातार हो रही मौतों, प्रशासन के रुख और साफ पानी की व्यवस्था न होने से क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

शुक्रवार को भागीरथपुरा निवासी 82 वर्षीय विद्याबाई यादव और 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की मौत हो गई थी। दोनों को पहले उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बद्री प्रसाद को पहले एमवाय अस्पताल और बाद में अरबिंदो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। इसके बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। वहीं, विद्याबाई यादव भी लंबे समय से बीमार थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

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इन मौतों के बाद शनिवार सुबह आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने भागीरथपुरा पुल के पास शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। शव यात्रा घर से मालवा मिल मुक्तिधाम के लिए निकली थी लेकिन पुलिया के पास लोगों ने रास्ता रोक दिया और सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया गया। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे, पार्षद राजू भदौरिया, अमित पटेल, दीपू यादव सहित कई कांग्रेस नेता मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के समर्थन में धरने पर बैठ गए।

परिजनों का आरोप है कि बद्री प्रसाद की मौत को एक दिन से ज्यादा समय बीत चुका था लेकिन प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। परिवार ने बताया कि वे बेहद गरीब हैं और उनके पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि वे मुआवजे के लिए नहीं बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि दूषित पानी की वजह से लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं और जान गंवा रहे हैं लेकिन प्रशासन अब इन मौतों को डायरिया से जोड़ने से इनकार कर रहा है।

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बद्री प्रसाद के बेटे शैलेंद्र ने बताया कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ थे। अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उनकी हालत बिगड़ी और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। शैलेंद्र यह भी बताया कि दो महीने पहले उनकी पत्नी कंचन की भी मौत हो चुकी है। उस समय भी क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या थी और परिवार का आरोप है कि कंचन की मौत भी इसी कारण हुई थी। तब भी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और इलाके में जाम की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ता देख अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ देर बाद एसडीएम निधि वर्मा, एसीपी विनोद दीक्षित सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बात की। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में जल्द स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराई जाएगी और बद्री प्रसाद व उनकी बहू कंचन की मौत के मामले में सीएमएचओ से पूरी रिपोर्ट लेकर शासन स्तर पर आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और चक्काजाम हटाया गया। इसके बाद शव यात्रा मालवा मिल मुक्तिधाम के लिए रवाना की गई।

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भागीरथपुरा में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। दूषित पानी से प्रभावित मरीजों का अस्पतालों में इलाज जारी है। फिलहाल बस्ती के 10 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनमें से दो वेंटिलेटर पर और कुछ आईसीयू में हैं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि अब डायरिया के नए मरीज सामने नहीं आ रहे हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी इक्का-दुक्का मरीज ही पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक 450 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। मरीजों की संख्या में जरूर कमी आई है लेकिन मौतों के आंकड़े और कारणों को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच लगातार टकराव बना हुआ है। पानी की सप्लाई को लेकर प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है और नियमित सैंपलिंग की जा रही है। वहीं, बाकी 70 प्रतिशत इलाके में नई मुख्य पाइपलाइन डालने का काम जारी है। इसके बावजूद स्थानीय रहवासी अब भी नल के पानी का उपयोग नहीं कर रहे हैं और टैंकर या आरओ के पानी पर ही निर्भर हैं।

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