देशभर में LPG की किल्लत, गैस एजेंसियों पर लगी लंबी लाइनें, कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप

खाड़ी देशों में युद्ध के कारण भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर का भारी संकट पैदा हो गया है। दिल्ली, यूपी, एमपी सहित कई राज्यों में हाहाकार मचा है। कमर्शियल सप्लाई पूरी तरह ठप है और घरेलू सिलेंडर अब पुलिस सुरक्षा में बंट रहे हैं।

Updated: Mar 11, 2026, 02:11 PM IST

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है। देश के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। जबकि, कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई कई जगहों पर पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि होटल रेस्टोरेंट, कैटरिंग सर्विस और बड़े आयोजनों में खाना बनाना मुश्किल हो रहा है।

सबसे ज्यादा असर कमर्शियल एलपीजी पर देखा जा रहा है। सप्लाई रुकने से देश के कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में करीब 50 हजार से ज्यादा रेस्टोरेंट, पब, बार और होटल गैस की कमी से प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर रसोई चलाने के लिए वैकल्पिक तरीकों की तलाश शुरू हो गई है।

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मध्य प्रदेश में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दी गई है। जबकि, घरेलू सिलेंडर के लिए गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। शादी विवाह के सीजन के चलते कैटरर्स की परेशानी और बढ़ गई है। अकेले भोपाल में अगले 20 दिनों में एक हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं। ऐसे में कैटरिंग कारोबारियों का कहना है कि हालात लगभग इमरजेंसी जैसे हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश में भी कई जिलों में सिलेंडर के लिए मारामारी की स्थिति बन गई है। गोरखपुर और सिद्धार्थनगर जैसे शहरों में गैस सिलेंडर पुलिस सुरक्षा में बांटे जा रहे हैं। कई जगह लोग तड़के तीन बजे से ही एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं लेकिन सीमित स्टॉक के कारण सभी को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। बिहार के पटना, गोपालगंज, खगड़िया और औरंगाबाद जैसे जिलों में भी लोगों को सुबह से एजेंसियों के बाहर इंतजार करना पड़ रहा है। जबकि, कुछ एजेंसियों में दो दिन से बुकिंग तक बंद है।

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राजस्थान में सिलेंडरों की कमी के साथ कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। जयपुर में जहां कमर्शियल सिलेंडर की सरकारी कीमत करीब 1900 रुपए है वहीं कुछ जगहों पर इसे 2500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। पंजाब के लुधियाना और फरीदकोट जैसे जिलों में सर्वर समस्या के कारण घरेलू सिलेंडर की बुकिंग भी प्रभावित हुई है। जबकि, कई जिलों में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद है। गैस की कमी का असर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में कमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण राम रसोई को तय समय से पहले बंद करना पड़ा। कई मंदिरों ने खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संकट के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद हो जाना है। करीब 167 किलोमीटर लंबे इस समुद्री मार्ग से दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत भी अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से आयात करता है। युद्ध की स्थिति के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो गई है।

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दूसरी बड़ी वजह ईरान की ओर से पश्चिम एशिया में किए गए ड्रोन हमलों के बाद कतर के एलएनजी प्लांट का उत्पादन प्रभावित होना है। कतर भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है और भारत अपनी करीब 40 प्रतिशत एलएनजी जरूरत वहीं से पूरी करता है। उत्पादन रुकने से गैस की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा है। स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों प्रमुख तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति देशभर में एलपीजी सप्लाई की निगरानी करेगी। साथ ही गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 भी लागू किया गया है।

सरकार ने घरेलू गैस बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन के बाद ही बुक किया जा सकेगा। इसके अलावा फर्जी डिलीवरी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए डिलीवरी के समय ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और बताया जा रहा है कि घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है।

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इस बीच सरकार रेस्टोरेंट और होटल उद्योग की समस्याएं सुनने के लिए भी तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक कमेटी बना रही है जो कमर्शियल गैस की जरूरत के अनुसार सप्लाई की प्राथमिकता तय करेगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोगों से घबराकर गैस जमा करने से बचने की अपील की है। उनका कहना है कि उद्योगों को फिलहाल उनकी जरूरत का 70 से 80 प्रतिशत गैस मिल रहा है और सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात बढ़ाने पर काम कर रही है।