गुना में आदिवासी महिला को जिंदा जलाया, 80 फीसदी झुलसी, जमीन पर कब्जा करना चाहते थे आरोपी

पीड़ित परिवार के साढ़े 6 बीघा जमीन पर आरोपियों ने कर रखा था कब्जा, महिला खेत पर गई तो डीजल छिड़ककर जिंदा जला दिया, गंभीर अवस्था में भोपाल लाया गया

Updated: Jul 03, 2022, 09:40 AM IST

गुना में आदिवासी महिला को जिंदा जलाया, 80 फीसदी झुलसी, जमीन पर कब्जा करना चाहते थे आरोपी

गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में दबंगों ने एक आदिवासी महिला को जिंदा जला डाला। बताया जा रहा है कि आरोपी उसके साढ़े 6 बीघा जमीन पर कब्जा जमाना चाहते थे। महिला जब खेत पर गई तो आरोपियों ने डीजल डालकर उसे जिंदा जला दिया। 

मामला बमोरी के धनोरिया गांव का है। यहां अर्जुन सहारिया की पत्नी रामप्यारी बाई को दबंगों ने आग के हवाले कर दिया। इससे वह 80 फीसदी तक झुलस गई। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। स्थिति बिगड़ता देख डॉक्टरों ने उसे भाेपाल रेफर कर दिया। यह घटना शनिवार दोपहर 2 से 3 बजे की बताई जा रही है।

दरअसल, अर्जुन के साढ़े 6 बीघा जमीन पर आरोपियों ने एक साल से कब्जा कर रखा था। करीब दो महीने पहले इस मामले का निबटारा करते हुए तहसीलदार ने उक्त जमीन पर सहरिया परिवार को वापस कब्जा भी दिलाया। इसके बावजूद शनिवार को आरोपी खेत की जुताई करने पहुंच थे।

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महिला को जब पता चला कि आरोपियों द्वारा जमीन की जुताई की जा रही है तो वह खेत में पहुंच गई। यहां आरोपियों ने महिला पर डीजल डालकर उसे जला दिया। अर्जुन ने बताया कि जब वह खेत जा रहा था तब वहां से आरोपी प्रताप, हनुमत, श्याम किरार, उन तीनों की पत्नियां व मां ट्रैक्टर से भाग रहे थे। जबकि उनकी पत्नी खेत में पेड़ के पास थी, उसके सारे कपड़े जल गए थे और वहां धुंआ निकल रहा था।

अर्जुन ने बताया कि आरोपी उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। बीते 23 जून को उन्होंने एसपी को आवेदन देकर आरोपियों से अपनी जान का खतरा बताया था। इससे पहले उन्होंने बमोरी थाने में भी आवेदन दिया था लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। फरवरी में आरोपियों ने बमोरी तहसील प्रांगण के पास अर्जुन के साथ भी मारपीट की थी। इसकी एफआईआर भी की गई थी।

गुना एसपी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि महिला के पति अर्जुन सहरिया की शिकायत पर आरोपियों केएफआईआर दर्ज कर ली गई है। फरियादी द्वारा बताए गए तीन आरोपियों प्रताप, श्याम और हनुमत में से दो को हिरासत में भी ले लिया गया है। आरोपियों ने फरियादी पक्ष की जमीन पर कब्जा कर रखा था, जिसे मई में ही मुक्त कराया गया था।’