इंदौर के बाद भोपाल का पानी भी हुआ दूषित, 4 इलाकों के सैंपल फेल, ई-कोलाई की हुई पुष्टि
इंदौर दूषित पानी मौतों के बाद अब भोपाल का भूजल भी खतरनाक निकला। खानूगांव, वाजपेयी नगर और आदमपुर खंती के चार सैंपल ई-कोलाई संक्रमित पाए गए।
भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब राजधानी भोपाल का पानी भी सवालों के घेरे में आ गया है। इंदौर के दूषित पानी कांड को लेकर जहां प्रदेश से लेकर देशभर में चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं वहीं भोपाल के भूजल में बैक्टीरिया मिलने की लैब रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है। यह दावा किसी बयान का नहीं बल्कि पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट का है।
भोपाल में किए गए पानी के परीक्षण में शहर के चार इलाकों के सैंपल फेल पाए गए हैं। खानूगांव, वाजपेयी नगर और आदमपुर खंती क्षेत्र से लिए गए भूजल आधारित पेयजल नमूनों में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। खास बात यह है कि यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में भी पाया गया था जहां अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है।
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संक्रमण की पुष्टि के बाद नगर निगम ने इन इलाकों में भूजल आधारित जल स्रोतों से जलप्रदाय पर रोक लगा दी है। नगर निगम के मुताबिक 6 जनवरी को शहर के कुल 250 इलाकों से पानी के सैंपल लिए गए थे जिनमें चार सैंपल बैक्टीरिया से संक्रमित पाए गए। इनमें दो सैंपल आदमपुर खंती के पास से, एक वाजपेयी नगर के नलकूप से और एक खानूगांव के कुएं से लिया गया था। हालात को देखते हुए लोग एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं।
हालांकि, नगर निगम अफसरों का कहना है कि यह दूषण पाइपलाइन से सप्लाई होने वाले पानी में नहीं बल्कि ग्राउंड वाटर में पाया गया है। निगम का दावा है कि आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव में भूजल आधारित जल स्रोतों से पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है और लोगों को ऐसे स्रोतों के पानी का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। इसके बावजूद जमीनी सच्चाई यह है कि खानूगांव में अब भी करीब 2 हजार लोग दूषित पानी पी रहे हैं।
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खानूगांव जिस वार्ड में आता है वहां की पार्षद रेहाना सुल्तान हैं। पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद जहीर ने कुएं में सीवेज का पानी जाते हुए खुद वीडियो बनाया था। उनका आरोप है कि खानूगांव क्षेत्र में कई दिनों से सीवेज सीधे कुएं में मिल रहा था और इसी कुएं से करीब 2000 लोगों को पानी बांटा जा रहा था। इस समस्या की लिखित शिकायत 15 दिन पहले नगर निगम को दी गई थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन लोग लंबे समय तक दूषित पानी पीते रहे।
इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। दो दिन पहले कांग्रेस विधायक आतिफ अकील खानूगांव पहुंचे थे और मौके पर नगर निगम के इंजीनियरों को जमकर फटकार लगाई थी। विधायक ने लापरवाही के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था लेकिन हालात में तुरंत सुधार नहीं हो सका।
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आदमपुर छावनी की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। आदमपुर कचरा खंती के एक किलोमीटर के दायरे में पांच गांव बसे हैं जहां चार हजार से ज्यादा लोग शुद्ध हवा और साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। करीब 800 मीटर के दायरे में भूजल और हवा दोनों दूषित हो चुकी हैं। खेतों की मिट्टी की उत्पादन क्षमता तक घट गई है। इस मुद्दे को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं और पर्यावरणविदों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका भी दाखिल की है।
भोपाल में पानी की समस्या केवल इन चार इलाकों तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि शहर के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं जिन्हें डेंजर जोन माना जा रहा है। इन इलाकों में करीब 400 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन सीवेज लाइन के साथ-साथ बिछी हुई है। नवीबाग और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र जैसे बड़े इलाके भी इसमें शामिल हैं जहां लगभग पांच लाख की आबादी रहती है।
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नगर निगम के मुताबिक, इन इलाकों में लगी लोहे की पाइपलाइन अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। पुरानी होने के कारण इनमें लीकेज सबसे ज्यादा होता है जिससे गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिलने का खतरा बना रहता है। पूरी पाइपलाइन बदलने के लिए निगम को करीब 500 करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में कुल 2.71 लाख नल कनेक्शन हैं जिनमें से करीब 75 हजार कनेक्शनों की लाइन तत्काल बदलने की जरूरत है। इसके अलावा अमृत-2 योजना के तहत शहर में 750 किलोमीटर नई पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम भी चल रहा है।
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जिन इलाकों में पाइपलाइन सबसे ज्यादा पुरानी और जर्जर बताई जा रही है उनमें जोन-3 के बाबू जगजीवन राम, नारियल खेड़ा, गीतांजलि, जोन-4 के जेपी नगर, मोतीलाल नेहरू, इब्राहिमगंज शामिल हैं। वहीं, जोन-5 के रॉयल मार्केट, बाग मुंशी हुसैन, शाहजहांनाबाद, लाल बहादुर शास्त्री और मोती मस्जिद शामिल हैं। इसके अलावा इस्लामपुर, जोन-16 का गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, राजीव गांधी, भोपाल मेमोरियल, भानपुर और जोन-17 के बड़वाई, छोला, रूसल्ली, करोंद, नवीबाग, देवकी नगर, अंबेडकर नगर और चौकसे नगर में भी लीकेज की समस्या सबसे ज्यादा है।
नगर निगम का दावा है कि अब तक शहर में एक हजार से ज्यादा पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं और सप्लाई वाटर का कोई सैंपल फेल नहीं हुआ है। लेकिन पुराने भोपाल के कई इलाकों में जगह की कमी के चलते सीवेज और पानी की लाइनें एक साथ बिछी हुई हैं। लोहे की पाइपलाइन होने के कारण रिसाव की समस्या लगातार बढ़ रही है।
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