इंदौर: सैलरी नहीं दी, फिर नौकरी से भी निकाला, परेशान होकर फैक्ट्री के 7 कर्मचारियों ने खाया जहर

इंदौर में एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करने वाले सात कर्मचारियों ने एक साथ जहर खा लिया। सभी को कंपनी से निकाल दिया गया था, इसलिए उन्होंने खौफनाक कदम उठाया। फिलहाल सभी का एमवाई अस्पताल में उपचार जारी है।

Updated: Sep 01, 2022, 03:59 PM IST

इंदौर: सैलरी नहीं दी, फिर नौकरी से भी निकाला, परेशान होकर फैक्ट्री के 7 कर्मचारियों ने खाया जहर

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में गुरुवार को एक निजी कंपनी के सात कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर एक साथ जहर खा लिया। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले ही फैक्ट्री के मालिक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। गुरुवार सुबह सातों कर्मचारी फैक्ट्री पहुंचकर मालिक से विनती करने पहुंचे थे। लेकिन फैक्ट्री मालिक ने मिलने तक से इनकार कर दिया। उन्हें पिछले महीने की सैलरी भी नहीं दी गई थी। इसी बात से परेशान होकर
सभी कर्मचारियों ने जहरीला पदार्थ खा लिया।

जानकारी के मुताबिक घटना परदेशीपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत अजमेरा वायर फैक्ट्री की है। यह कंपनी मॉड्यूलर किचन का सामान बनाने का काम करती है। यहां पर 15 से 20 कर्मचारी काम करते हैं। अचानक  बुधवार को कंपनी के मालिक रवि बाफना और पुनीत अजमेरा ने सात कर्मचारियों गुरुवार से काम पर नहीं आने के लिए कहा था। उनसे कहा गया था कि अब यहां उनके लायक काम नहीं है। जबकि वे वर्षों से इनके लिए काम कर रहे थे।

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कर्मचारियों ने सोचा कि अभी मालिक गुस्से में हैं, बाद में हाथ पैर जोड़ने पर उन्हें वापस नौकरी पर रख लिया जाएगा। अगले दिन वे फिर फैक्ट्री में पहुंचे लेकिन मालिकों ने मिलने तक से मना कर दिया। भविष्य को लेकर चिंतित कर्मचारी डिप्रेशन में आ गए और उन्होंने फैक्ट्री के बाहर ही जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर साथी कर्मचारी अनिल निगम सभी को उपचार के लिए दोपहर एमवाई अस्पताल लेकर पहुंचे जहां सभी का इलाज किया जा रहा है।

कर्मचारी अनिल निगम ने मीडिया को बताया कि दोनों मालिक रवि और पुनीत ने इलेक्ट्रानिक कॉम्प्लेक्स और एमआर 10 पर दो अन्य फैक्ट्रियां डाली थीं। इसलिए उन्होंने यहां माल बनवाना बंद कर दिया था। ऑर्डर होने के बाद भी अजमेरा वायर पर काम नहीं करवाया जा रहा था। यहां कर्मचारियों पर काफी दिन से काम छोड़ने को लेकर दबाव भी बनाया जा रहा था। बाद में सात कर्मचारियों की छंटनी की गई। 

जहर खाने वाले कर्मचारियों में गौरी नगर निवासी 46 वर्षीय जमनाधार विश्वकर्मा, गौरी नगर निवासी 45 वर्षीय दीपक सिंह, नेहरू नगर निवासी 46 वर्षीय राजेश मेमारिया, देवीलाल करेडिया (45) निवासी मालवा मिल उनके भाई रवि करडिया (32), जितेन्द्र धमनिया (45) निवासी सुंदर नगर और शेखर वर्मा (19) निवासी मालवा मिल शामिल हैं।

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जमनाधार विश्वकर्मा ने बताया कि उनके पिता को लकवा है। दो बेटियां हैं, जो पढ़ाई कर रही हैं। अचानक नौकरी जाने से उनके परिवार पर गंभीर संकट आ जाएगा। वह यहां 20 साल से काम कर रहे हैं। अब कहां नया काम करेंगे? कर्मचारी दीपक के परिवार में पत्नी, बेटा और माता-पिता हैं। और वे अकेले कमाने वाले हैं। वहीं, राजेश के परिवार में तीन बच्चे, पिता और एक भाई है। देवीलाल के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। रवि के परिवार में भी दो बच्चे, पत्नी और माता-पिता हैं। जितेंद्र के तीन बच्चे और पत्नी हैं। शेखर तीन बहनों में इकलौता भाई है और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कम उम्र में ही उसने नौकरी करना शुरू कर दिया।