इंदौर में नो UPI डे की तैयारी, व्यापारिक संगठनों ने की 23 सितंबर को डिजिटल पेमेंट से दूरी की अपील

इंदौर में UPI के बड़े मर्चेंट लेन-देन पर प्रस्तावित चार्ज के विरोध में 23 सितंबर को नो UPI डे मनाने की तैयारी तेज हो गई है।

Updated: Sep 22, 2026, 11:13 AM IST

इंदौर। UPI के बड़े मर्चेंट लेन देन पर प्रस्तावित चार्ज के विरोध में 23 सितंबर को प्रस्तावित नो UPI डे को लेकर इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने अभियान तेज कर दिया है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान को समर्थन देते हुए इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने पोस्टर, कॉल सेंटर और सोशल मीडिया के जरिए व्यापारियों और ग्राहकों तक संदेश पहुंचाने की तैयारी शुरू की है। अभियान के तहत करीब 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के मुताबिक, शहर के अलग-अलग बाजारों में नो UPI डे से जुड़े पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही कॉल सेंटर के माध्यम से व्यापारियों से सीधे संपर्क किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी डिजिटल सामग्री साझा कर अभियान के उद्देश्य और 23 सितंबर के कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इस पहल का मकसद UPI या डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं है। उनका मुख्य मुद्दा बड़े मूल्य के पात्र मर्चेंट लेन-देन पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर है। व्यापारियों को आशंका है कि इस तरह की लागत बढ़ने से कम मार्जिन पर काम करने वाले खुदरा कारोबार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है।

नो UPI डे को व्यापारियों ने सांकेतिक विरोध के रूप में आयोजित करने की अपील की है। इसके तहत 23 सितंबर को एक दिन UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने और प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज को लेकर अपनी चिंता दर्ज कराने की बात कही जा रही है। अभियान के दौरान ग्राहकों के साथ संवाद बनाए रखने और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से चलाने पर जोर दिया जा रहा है।

अभियान को ज्यादा व्यापारियों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों के साथ व्यापारिक नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मंगलवार से कॉल सेंटर के जरिए बाजारवार संपर्क अभियान चलाने की तैयारी है। जिससे अधिक से अधिक व्यापारी 23 सितंबर की पहल से जुड़ सकें। सोशल मीडिया पर पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री के माध्यम से आम उपभोक्ताओं को भी अभियान के बारे में जानकारी दी जाएगी।

अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारियों की मांग डिजिटल भुगतान को खत्म करने की नहीं है। वे मर्चेंट चार्ज की प्रस्तावित व्यवस्था, उससे जुड़ी लागत और रिफंड जैसी व्यावहारिक प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। इसी मुद्दे को सामने रखने के लिए 23 सितंबर के नो UPI डे को सांकेतिक विरोध के तौर पर आयोजित किया जा रहा है।