जवान बेटे के शव को हाथ ठेले पर ले जाने को मजबूर पिता, मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों का शर्मनाक सच

मिन्नतों के बाद अगले दिन पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुआ हॉस्पिटल प्रशासन, जवान बेटे का शव ले जाने के लिए पिता के पास नहीं थे पैसे, किराए पर लिया हाथ ठेला

Updated: Apr 01, 2021, 02:03 PM IST

जवान बेटे के शव को हाथ ठेले पर ले जाने को मजबूर पिता, मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों का शर्मनाक सच
Photo Courtesy: Bhaskar

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले से स्वास्थ्य विभाग की हकीकत बयां करती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देख किसी की भी आंखें नम हो जाएंगी। यहां युवक की मौत के बाद शव ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया तो बेबस पिता ने एक हाथ ठेला किराए पर लिया और अपने जवान बेटे के शव को ले जाने लगा। मानवता को सर्मसार करने वाली इस घटना को लेकर जब स्थानीय संगठन ने हंगामा किया था पुलिस ने आनन-फानन में ऑटो भिजवाया।

दरअसल, गुना जिले कुंभराज गीता नगर निवासी नितेश राव की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी। मृतक के पिता हेमराज राव ने बताया कि उनके बेटे की अचानक तबीयत बिगड़ी। मंगलवार दोपहर 3.30 बजे जब उसे स्वास्थ्य केंद्र कुंभराज ले जाया गया तो डॉक्टर ने तत्काल मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को बिना पोस्टमार्टम के घर भेज दिया।

मृतक के पिता को लगा कि शव का पोस्टमार्टम होना चाहिए। इसके बाद उन्होंने किसी से मोटरसाइकिल मांगकर अपने जवान बेटे के शव को अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां काफी मिन्नतों के बाद भी उस दिन पोस्टमार्टम नहीं हो सका। शव वहीं रखी रही। अगले दिन यानी बुधवार को अस्पताल प्रशासन ने शव का पोस्टमार्टम किया। लेकिन, हद्द तो तब हो गई जब पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल से एक वाहन तक नहीं दिया गया।

हेमराज राव ने बताया कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे निजी वाहन किराए पर लेते। उन्होंने, किसी तरह एक हाथ ठेला किराए पर लिया और शव को रखकर ठेला खींचने लगे। अपने जवान बेटे के शव को ठेले से खींचकर ले जाते बुजुर्ग पिता को देखना अंदर तक झकझोरने वाला था। इस घटना पर नागरिक मंच कुंभराज ने आपत्ति ली, और कहा कि विकास के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, एक शव वाहन तक नहीं है। 

आक्रोशित लोगों ने हंगामा किया तो पुलिस पहुंची और ऑटो से शव को घर भेजा। मामले पर कुंभराज स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिस महेश जाटव का कहना है कि मैंने पहले ही मृत घोषित कर दिया था। दूसरी बार वे पीएम के लिए शव देरी से लाए थे इसलिए दूसरे दिन पीएम किया गया। वाहन हमारे पास नहीं है तो हमने पुलिस को बोल दिया था।