सीएम शिवराज को अपने गृह जिले में मिली मायूसी, भाषण सुनने नहीं आए लोग, खाली रह गई कुर्सियां

नसरुल्लागंज गौरव दिवस मनाने पहुंचे थे सीएम शिवराज, हफ्तों की तैयारी के बाद भी नहीं पहुंचे लोग, सैंकड़ों कुर्सियां खाली, कांग्रेस बोली- शिवराज के भाषणों में अब लोगों को रुचि नहीं रही

Updated: Apr 02, 2022, 06:15 PM IST

सीएम शिवराज को अपने गृह जिले में मिली मायूसी, भाषण सुनने नहीं आए लोग, खाली रह गई कुर्सियां

नसरुल्लागंज। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को नसरुल्लागंज गौरव दिवस मनाने पहूंचे थे। लेकिन सीएम चौहान को अपने गृहजिले के लोगों से भी मायूसी मिली। हफ्तों की तैयारियों के बावजूद सीएम का भाषण सुनने लोग नहीं पहुंचे। नतीजतन इस सभा में सैंकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी रह गई।

विपक्षी दल कांग्रेस ने सीएम के नसरुल्लागंज में आयोजित जनसभा का वीडियो साझा किया है। इसमें देखा जा सकता है कि सभा में कुछ दर्जन लोग ही मौजूद हैं, जबकि सैंकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी दिख रही हैं। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए हफ्तेभर पहले से तैयारियां चल रही थीं।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत सीएम शिवराज आज नसरुल्लागंज में दो करोड़ की लागत से बने कृषक संगोष्ठी भवन का उद्घाटन, नगर परिषद द्वारा बनाए गए सेल्फी प्वाइंट का अवलोकन और मंच से सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित करने वाले थे। लेकिन इन लाभ की योजनाओं के अवसर के बावजूद खाली कुर्सियों ने विपक्ष को हमले का मौका दे दिया।

बताया जा रहा है कि आयोजन की जिम्मेदारी सीहोर के प्रभारी मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी को दी गई थी। लेकिन सामने आई तस्वीरों से साफ है कि वह भीड़ जुटाने में कामयाब नहीं हो सके। हैरानी की बात है कि ये सीएम चौहान का गृह जिला भी है। जानकार बताते हैं कि शिवराज चौहान के प्रति सीहोर के लोगों में इतना अविश्वास कभी देखने को नहीं मिला।

युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आनंद जाट जो सीएम शिवराज के क्षेत्र से आते हैं उन्होंने कहा कि, 'आज मध्य प्रदेश में किसान, मजदूर, नौजवान, माताएं-बहनें और नौकरीपेशा वर्ग सब परेशान हैं। नीति आयोग के सूचकांक में मध्य प्रदेश देश का चौथा सबसे गरीब राज्य है। यहां की 37 फीसदी आबादी यानी तकरीबन ढाई करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। MP शिक्षा के क्षेत्र में 19 बड़े राज्यों में नीचे से तीसरे नंबर पर है और स्वास्थ्य के मामले में नीचे से दूसरे पायदान पर है।'

युवा नेता ने आगे कहा कि, 'राज्य में कुपोषण और दलित-आदिवासियों पर अत्याचार की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शिवराज सरकार ने कर्ज लेकर घी पिया है और माफ़ियातंत्र को मजबूत किया है। इसी का परिणाम है कि अब जनता का इनसे मोहभंग हो गया है और इनके अपने क्षेत्र की जनता भी इन्हें देखना नहीं चाहती है। जनता को पता है कि सीएम आएंगे और झूठे वादे करेंगे।'

बता दें कि साल 2003 में बीजेपी सरकार की गठन के बाद तत्कालीन सीएम उमा भारती ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए 'पंच-ज' (जल, जंगल, जमीन, जन व जानवर) अभियान चलाया था। इसके एक साल बाद बाबूलाल गौर सीएम बने तो वे गोकुल ग्राम की संकल्पना लेकर आए। लेकिन डेढ़ दशक तक सीएम रह चुके शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव से एक साल पहले गांवों और शहरों का गौरव दिवस मनाने की शुरुआत की है। इन आयोजनों से इवेंट कंपनियों को तो लाभ मिलता है, लेकिन आम लोग खाली हाथ ही घर लौटने को विवश हैं।