मशीनों से काम और फर्जी एंट्री, दिग्विजय सिंह के सामने फूटा मनरेगा श्रमिकों का गुस्सा
वित्त वर्ष 2024-25 में सीहोर जिले में मात्र 242 मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मिला जबकि जॉब कार्ड 2 लाख 81 हजार लोगों के पास है: दिग्विजय सिंह
सीहोर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MANREGA) में किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस देशभर में प्रदर्शन कर रही है। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सोमवार को सीहोर जिले के इच्छावर तहसील अंतर्गत खेरी गांव में मनरेगा जॉब धारकों के सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने श्रमिकों से इस योजना की जमीनी हकीकत व अन्य विषयों पर चर्चा की।
श्रमिकों ने बताया कि जॉब कार्ड होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को आज तक एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत स्तर पर मशीनों से काम कराया जा रहा है, ठेके पर कार्य दे दिए जाते हैं और मजदूरों के नाम पर फर्जी एंट्री कर पैसे निकाल लिए जाते हैं। मजदूरों को 10 दिन की मजदूरी दी जाती है, जबकि खाते में 30 दिन की मजदूरी डालकर 20 दिन का पैसा वापस ले लिया जाता है।
जॉब कार्ड है, लेकिन एक दिन भी काम नहीं
स्थानीय श्रमिक राधेश्याम कामले ने बताया कि उनका जॉब कार्ड बना हुआ है, लेकिन आज तक मनरेगा में एक दिन भी काम नहीं मिला। उनके जॉब कार्ड में एक भी एंट्री नहीं है। वहीं, हेमराज मालवीय ने बताया कि जब भी वे काम मांगने पंचायत जाते हैं तो यह कहकर टाल दिया जाता है कि काम ठेके पर दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि विगत पांच साल से उन्हें मनरेगा में कोई काम नहीं मिला। एक अन्य मजदूर प्रभुलाल ने आरोप लगाया कि उनके जॉब कार्ड में एंट्री तो होती है, लेकिन पूरा पैसा उन्हें नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि पंचायत वाले पैसे निकाल लेते हैं और हमें दो-चार सौ रुपये दे देते हैं।महिला श्रमिक गंगा बाई ने भी कहा कि काम मांगने पर उन्हें हमेशा टाल दिया जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मनरेगा श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा, 'कांग्रेस पार्टी ने इस देश को आजादी दिलाई। नागरिकों को वोट का अधिकार दिया ताकि आप जिसे चाहो उसे अपना प्रतिनिधि बनाओ। लेकिन आज लोकतंत्र खतरे में है, गरीब खतरे में है।' उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जब कांग्रेस की सरकार आती है गरीबों के लिए योजना बनाती है लेकिन जब भाजपा की सरकार आती है वह पूरे तरीके से उद्योगपतियों के लिए काम करती है। 
सिंह ने बताया कि UPA की सरकार के दौरान 90 हजार किसानों के कर्ज माफ किए गए थे। इसके साथ ही मनरेगा योजना शुरू की गई ताकि छोटे किसानों को काम मिल सके। उस समय पंचायतों को काम शुरू करने अधिकार था, लेकिन अब बड़े ठेकदारों को ये अधिकार दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने बताया कि साल 2021-22 में सीहोर जिले में सिर्फ 792 श्रमिकों को मनरेगा के तहत काम मिला, जबकि जॉब कार्ड 2 लाख 81 हजार लोगों के पास है। उन्होंने कहा कि अब हालत ये हो गई है साल 2024-25 में मात्र 242 मजदूरों को काम मिला।
सिंह ने बताया कि पहले मनरेगा योजना के तहत 100 में से 90 फीसदी राशि केंद्र सरकार भेजती था। नए कानून के बाद अब बस 60 फीसदी पैसा आएगा और शेष राज्य सरकार को देना होगा लेकिन मध्य प्रदेश सरकार के पास तो पैसे ही नहीं है। सिंह ने आरोप लगाया कि ये बदलाव मनरेगा योजना को पूरी तरह खत्म करने के लिए किया गया है। भाजपा सरकार धीरे-धीरे मजदूरों के हितों के साथ कुठाराघात कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि ये कौन सा धर्म है जो आपको गरीबों का पेट काटकर बड़े लोगों का घर भरने के लिए बाध्य करता है। सिंह ने कहा कि कांग्रेस गरीब, किसान और मजदूरों की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई लंबी है और इसे लड़ने के लिए आपके सहयोग की अपेक्षा है।
इस दौरान CPIM के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान जब मोदी सरकार ने ट्रेन बंद की तो लोग पांच हजार किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर लौटे। रास्ते में पुलिस की लाठियां भी खाई। जब घर लौटे तो आजीविका चलाने के लिए उन्हें मनरेगा से ही काम मिला। लेकिन अब सरकार कह रही है कि सिर्फ सक्रिय जॉब कार्ड धारकों को ही काम मिलेगा। इसका परिणाम होगा कि कई लोग जो यहां बता रहे हैं कि उनके कार्ड रोजगार सहायक अथवा सरपंच के पास हैं और उनके नाम से फर्जी एंट्री होती है, उनके कार्ड तो बच जाएंगे। लेकिन वे लोग जो काम मांग रहे हैं उनका कार्ड फर्जी करार दिया जाएगा। यानी फर्जी कार्ड बच जाएंगे और असली कार्ड खत्म कर देंगे।




