MP में 27 फीसदी OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, जबलपुर हाईकोर्ट को वापस भेजा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 27 फीसदी OBC आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेजते हुए कहा कि हाई कोर्ट को ही आखिरी फैसला लेना चाहिए।

Updated: Feb 19, 2026, 03:53 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 27 फीसदी आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने OBC आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेजते हुए कहा कि हाई कोर्ट को ही आखिरी फैसला लेना चाहिए।

दरअसल, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के कुछ कैंडिडेट्स की तरफ से फाइल की गई याचिका में कहा गया है कि कोर्ट द्वारा कानून पर रोक न लगाए जाने के बावजूद, राज्य पब्लिक सर्विस कमीशन ने पिछले सालों में घोषित वैकेंसी में से 13% को होल्ड कर रखा है। याचिका में मांग की गई है कि उन पदों पर भर्ती कानून के अनुसार, यानी 27% OBC रिज़र्वेशन के साथ की जाए।

यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था, लेकिन अब कोर्ट ने हाई कोर्ट को वापस कर दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 27% OBC रिज़र्वेशन लागू करना और पोस्ट अनलॉक (अनहोल्ड) करना राज्य सरकार की नीयत और पॉलिसी पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला पिंग-पोंग बॉल की तरह यहां से वहां घूम रहा है, जो उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस पर ठोस निर्णय होना चाहिए।

एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण से जुड़े सभी केस मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन केस को हाई कोर्ट में ट्रांसफर करते हुए कहा कि OBC आरक्षण कानून की संवैधानिक वैधता का फैसला हाई कोर्ट को करना चाहिए।