MP नर्सिंग काउंसिल ने 200 नर्सिंग कॉलेजों की निरस्त की मान्यता, 1 लाख से ज्यादा बच्चों का संकट में भविष्य

इससे पहले उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ द्वारा जांच के आदेश के बाद मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉउंसिल ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के 14 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है... जिन कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई है उनमें ग्वालियर जिले के 13 और मुरैना जिले के एक कॉलेज शामिल हैं

Updated: Jun 22, 2022, 01:05 PM IST

MP नर्सिंग काउंसिल ने 200 नर्सिंग कॉलेजों की निरस्त की मान्यता, 1 लाख से ज्यादा बच्चों का संकट में भविष्य
Photo Courtesy: lalluram

भोपाल। मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल के 200 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है। नर्सिंग काउंसिल ने चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय को सूची भेज दी है। इससे प्रदेश के करीब एक लाख से भी ज़्यादा नर्सिंग छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में आ गया है। नर्सिंग काउंसिल ने ये कार्रवाई सत्र शुरू होने के एक साल बाद की है नर्सिंग कॉलेजों से सम्बद्ध अस्पतालों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। सबसे ज्यादा भोपाल और ग्वालियर संभाग के कॉलेज इससे प्रभावित हुए हैं।

मान्यता रद्द होने के बाद शिक्षा एवं चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि नर्सिंग कॉलेजों के शुद्दीकरण किया जा रहा है। हमने इस क्षेत्र को साफ सुथरा करने का निर्णय लिया था, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई है।  शिक्षा के क्षेत्र में फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा। प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। फर्जी कॉलेज ही रहेंगे तो छात्रों के भविष्य खतरे में रहेंगे ही। हम एक नीति बनाने की तैयारी करेंगे जिससे छात्रों को कोई नुकसान नहीं होगा।

दरअसल नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए अस्पताल की जरूरत होती है, लेकिन नर्सिंग कॉलेज संचालकों ने अस्पताल कागजों पर ही खोल लिए थे। 100 बेड के अस्पताल पर क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए कॉलेज को 30 विद्यार्थी को पढ़ाने की अनुमति होती है, इसमें द्वितीय और तृतीय वर्ष के बच्चे भी क्लीनिकल ट्रॉयल करते हैं। इस तरह एक बेड पर एक छात्र-छात्रा को सीखने का मौका मिलता है। अब मान्यता निरस्त होने के बाद जिस कॉलेज में बंद होने वाले कॉलेजों के बच्चों को समायोजित किया जाता है, वहां अस्पताल की सीट और बच्चों के अनुपात का मानक टूटेगा।

यह मामला कोरोना के समय प्रकाश में आया, जब कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कराने के लिए इन अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएँ नदारद मिली। इसके बाद नर्सिंग काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों की जांच करवाई है। जाँच में करीब 200 नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग कॉउंसिल के क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए सम्बद्ध अस्पताल और प्रशिक्षण में कमी पाई जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। 

नर्सिंग काउंसिल ने अप्रेल 2022 के दूसरे सप्ताह में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता की सूची कॉलेजों के लॉगिन पर भेजी। मान्यता निरस्त होने की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज संचालक सकते में आ गए, क्योंकि उन्हें न सिर्फ कॉलेज बंद करना पड़ेगा, बल्कि पूर्व से प्रवेशित अलग-अलग सत्रों के नर्सिंग विद्यार्थियों को भी अन्य कॉलेजों में समायोजित करना होगा। कॉलेजों में पूर्व से पढ़ रहे विद्यार्थियों को कहां समायोजित किया जाएगा इसके बारे में अभी तक काउंसिल ने कोई निर्णय नहीं लिया है।

नर्सिंग कॉलेज संचालक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष नवीन सैनी ने कहा कि नर्सिंग काउंसिल का निर्णय गलत है, इसके खिलाफ हम मंत्री से शिकायत करेंगे। पिछले सत्र की मान्यता प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की, जबकि कॉलेजों में विद्यार्थियों का प्रवेश हो चुका है। अभी सूची सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन पूरे प्रदेश में 200 से अधिक कॉलेजों की मान्यता निरस्त हुई है। वहीं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत बरवड़े ने कहा कि मान्यता की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई है, इस संदर्भ में रजिस्ट्रार से जवाब तलब किया जाएगा। सूची सार्वजनिक होनी चाहिए। कॉलेजों को रिव्यू भी कर रहे हैं, ग्वालियर के कुछ कॉलेज संसोधित हुए हैं। बच्चों के हित की रक्षा भी नियमानुसार की जाएगा।

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इससे पहले उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ द्वारा जांच के आदेश के बाद मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉउंसिल ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के 14 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है। जिन कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई है उनमें ग्वालियर जिले के 13 और मुरैना जिले के एक कॉलेज शामिल हैं। भिंड के निवासी हरिओम ने क्षेत्र में संचालित नर्सिंग कॉलेजों की संबध्दता के विषय में ग्वालियर खंड पीठ में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि नर्सिंग कॉलेजों ने अपने स्वयं के 100 बेड क्षमता वाले अस्पताल के दिशानिर्देश को पूरा नहीं किया है। यहां तक ​​कि अस्पतालों में प्रशिक्षित कर्मचारी और डॉक्टर नहीं थे।

उसके बाद कोर्ट ने 24 अगस्त 2021 को क्षेत्र में संचालित नर्सिंग कॉलेजों के निरीक्षण के लिए आयोग के गठन का आदेश दिया। बाद में, अखिल भारतीय निजी नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन ने जांच के लिए आयोग के गठन के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मामले को फिर से उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ को स्थानांतरित कर दिया और एक नया आयोग नियुक्त करने का निर्देश दिया। फिर उच्च न्यायालय ने इस साल 24 जनवरी को क्षेत्र के 271 नर्सिंग कॉलेजों में बुनियादी ढांचे की कमी की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया था।