हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद जितेंद्र जीते जी न देख पाए पक्की सड़क, शहादत के बाद गांव पहुंचा विकास

सीडीएस बिपिन रावत की सुरक्षा में तैनात थे जितेंद्र कुमार, शहादत के बाद आनन-फानन में शुरू हुआ सड़क निर्माण का काम, सीएम शिवराज के गृहक्षेत्र सीहोर का मामला

Updated: Dec 10, 2021, 11:23 AM IST

हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद जितेंद्र जीते जी न देख पाए पक्की सड़क, शहादत के बाद गांव पहुंचा विकास
Photo Courtesy: TheQuint

सीहोर। तमिलनाडु के कुन्नूर के पास बुधवार को हुए  हेलीकॉप्टर दुर्घटना में देश ने अपने कई जांबाज योद्धाओं को खो दिया। जनरल बिपिन रावत के साथ इस हादसे में मध्य प्रदेश के सीहोर के रहने वाले जितेंद्र की भी मौत हुई। जितेंद्र जीते जी अपने गांव में पक्की सड़क तो नहीं देख पाए, लेकिन उन्हें श्रद्धांजलि देने आ रहे नेताओं को परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन ने आनन-फानन में सड़कें बनवानी शुरू कर दी है।

दरअसल, बुधवार देर शाम यह खबर आई थी कि हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले 13 लोगों में एक जवान सीहोर के हैं। अगली सुबह यानी गुरुवार को सीहोर के धामंदा गांव में जितेंद्र कुमार के घर पत्रकारों का जमावड़ा लगा। यहां सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि घरवालों से बात कर जब पत्रकार वहां से निकल रहे थे तब उन्होंने देखा कि अचानक गांव की सड़कों का समतलीकरण शुरू हो गया है।

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पत्रकारों ने इस संबंध में जब ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बताया कि इससे पहले कभी सड़क का काम नहीं हुआ है। सड़क की न ही कोई टेंडर पास हुई है न ठेका अलॉट हुआ। जितेंद्र कुमार के शहीद होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी जल्दीबाजी में सड़क मरम्मत करने में जुट गए हैं। आज इसी सड़क से शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके घर ले जाया जाएगा। बताया जा रहा है कि जितेंद्र को श्रद्धांजलि देने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी आने की संभावना है, इसीलिए सड़क को ठीक किया गया है। 

चूंकि सीहोर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला है ऐसे में यदि वे यहां पहुंचते हैं और उबड़-खाबड़ रास्ते के चलते उन्हें दिक्कत होती तो इसकी गाज अधिकारियों पर गिरती। इसी दबाव के कारण शहीद के गांव में फटाफट सड़क समतलीकरण शुरू हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक ठीक एक महीने पहले 9 नवंबर को जितेंद्र कुमार छुट्टी खत्म होने के बाद घर से वापस ड्यूटी के लिए लौटे थे।

साफ है की जितेंद्र को जीते जी उस खराब सड़क से चलकर जाना पड़ा था। लेकिन आज भोपाल- इंदौर हाईवे से दो किलोमीटर अंदर धामंदा गांव में उनका पार्थिव शरीर समतल सड़क से होकर आएगा।