रेडिमेड कपड़ों पर 12 फीसदी GST का विरोध, मप्र, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र के व्यापारी आंदोलन के मूड में

केंद्र ने 1 जनवरी 2022 से फैब्रिक, रेडिमेड कपड़ों, धागों और जूतों पर GST 5 से बढ़ाकर 12 किया, एक जनवरी से लागू होगा टैक्स, व्यापारियों ने कहा टैक्स बढ़ने से बढ़ेगी महंगाई, जनता पर पड़ेगा बोझ, कपड़ा निर्माता और विक्रेता व्यापारी कर रहे रायशुमारी

Updated: Nov 23, 2021, 03:34 PM IST

रेडिमेड कपड़ों पर 12 फीसदी GST का विरोध, मप्र, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र के व्यापारी आंदोलन के मूड में
Photo courtesy: twitter

केंद्र की बीजेपी सरकार ने रेडिमेड कपड़ों और फुटवियर्स पर GST 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया है। ये बढ़ी हुई दरें जनवरी 2022 से लागू होने वाली हैं। सिले सिलाए कपड़े और जूतों में एक साथ 7 प्रतिशत GST में इजाफा होने से व्यापारियों में रोष है। अब कपड़ा कारोबारी इस फैसले के विरोध में आंदोलन करने का मन बना रहे हैं। इसके लिए मध्यप्रदेश के इंदौर, सूरत, दिल्ली, मुंबई के कपड़ा व्यापारी लामबंद होने लगे हैं।

व्यापारी वर्ग केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए विचार विमर्श करने लगे हैं। इसमें गुजरात के प्रमुख शहरों अहमदाबाद, सूरत के व्यापारियों के साथ दिल्ली, मुंबई, इंदौर समेत अन्य शहरों के कपड़ा निर्माता और विक्रेता व्यापारियों में रायशुमारी की जा रही है। व्यापारी GST की बढ़ी हुई दर वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने रेडिमेड कपड़ों और जूतों पर से GST की बढ़ी हुई दर कम नहीं की तो व्यापारी देश व्यापी आंदोलन को मजबूर हो जाएंगे।

इसकी शुरुआत इंदौर में की जा चुकी है। व्यापारियों ने लोगों को जागरुक करने के लिए पर्चे छपवाए हैं। जिसमें बताया गया है कि इस बढ़ी हुई GST का सीधा भार ग्राहकों पर पड़ेगा। इंदौर के व्यापारियों ने ग्राहकों से अपील की है कि हम तो इस GST का विरोध कर रहे हैं, आप भी इसका विरोध करें।

वहीं रेडिमेड कपड़ों में GST की बढ़ोतरी का क्लॉथिंग मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) ने भी विरोध किया है। CMAI का दावा है कि इससे बाजार में महंगाई बढ़ेगी, इसके कारण कपड़ों की मांग में कमी आएगी। केंद्र ने फैब्रिक और धागों पर GST 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया है। वहीं रेडिमेड ड्रेस पर भी 12 प्रतिशत GST वसूला जाएगा। इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ने जा रहा है। वहीं आशंका जताई जा रही है कि लोगों में बिना बिल के सामान खरीदने की प्रवृत्ति बढेगी।