बारदान की कमी से अटकी गेहूं खरीदी, कांग्रेस ने ऋण अदायगी की तारीख बढ़ाने की मांग की
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बारदान की कमी के कारण खरीदी कार्य बाधित है, जिससे किसान अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर विपक्ष हमलावर है। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले पर सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने सीएम यादव से प्रदेश में तत्काल गेहूं खरीदी शुरू करने और किसानों की ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है।
मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही है और अब तक इसकी तिथि तीन बार बदली जा चुकी है। बारदान की कमी के कारण खरीदी कार्य बाधित है, जिससे किसान अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सिंघार ने बताया कि इस स्थिति का सीधा असर किसानों की ऋण चुकाने की क्षमता पर पड़ रहा है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के करीब 64.17 लाख खाते संचालित हैं, जिन पर लगभग 86,995 करोड़ रुपये का बकाया ऋण है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस संबंध में 24 मार्च 2026 को भी सरकार को पत्र लिखकर ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि किसानों की ऋण अदायगी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए। साथ ही प्रभावित किसानों को डिफॉल्टर घोषित न किया जाए। उन्होंने बारदान की पर्याप्त व्यवस्था कर गेहूं खरीदी प्रक्रिया को जल्द और सुचारू रूप से पूरा करने की भी मांग की है।




