प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को खाट पर लिटाकर पार कराई नदी, ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर बचाई 2 जिंदगी

बैतूल जिले के शाहपुर ब्लॉक की घटना, प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी महिला, बारिश में सड़क तक जाने का नहीं था कोई इंतजाम, खाट पर लिटाकर ग्रामीणों ने पार कराई उफनती नदी, अस्पताल में हुआ बच्ची का जन्म

Updated: Aug 11, 2022, 05:06 PM IST

प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को खाट पर लिटाकर पार कराई नदी, ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर बचाई 2 जिंदगी

बैतूल। देशभर में आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाने की तैयारियां जोरों पर है। इसके इतर बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के बैतूल का एक गांव आजादी के 75 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में है। यहां से सामने आई एक तस्वीर प्रदेश के वर्तमान और भविष्य दोनों को संकट में होने के संकेत दे रही है। तस्वीर में देखा जा सकता है कि पुलिया न होने की वजह से प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता को ग्रामीण खाट पर लिटाकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे भारत की यह बदहाल तस्वीर बैतूल जिले के शाहपुर के ग्राम पंचायत पावरझंडा के अन्तर्गत आने वाले ग्राम जामुनढाना की है। इस आदिवासी बस्ती तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। स्थिति इतनी बेहाल है कि महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना भी अपनी जान जोखिम में डालने जितना कठिन है। 

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नदी पर पुल न होने से इस गांव के लोगों को हर साल बारिश के दौरान परेशानी आती है, जब गांव को जोड़ने वाले रास्ते के बीच से गुजरने वाली सुखी नदी उफान पर होती है। ऐसे में इलाज के लिए मरीजों को खाट पर लिटा कर नदी पार करानी पड़ती है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें गर्भवती महिला को खाट पर लिटा कर ग्रामीण कमर तक पानी में उफनती नदी पार करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, बुधवार को रूपेश टेकाम की गर्भवती पत्नी मयंती को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। महिला की स्थिति बिगड़ी जा रही थी ऐसे में डिलेवरी के लिए उसे अस्पताल ले जाना था। लेकिन नदी उफान पर थी तो जाना मुमकिन नहीं था। तब ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर गर्भवती महिला को खटिया में लिटाकर नदी पार करवाई। नदी पार करने के बाद वे तीन किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचे, तब जाकर उन्हें एक वाहन मिला। गाड़ी पर बैठकर वे शाहपुर के लिए निकले, लेकिन रास्ते में माचना नदी उफान पर मिली।

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आगे जाने के लिए कोई रास्ता न होने के कारण वे वापस लौट आए और महिला को भौरा के शासकीय अस्पताल ले गए। यहां मयंती को भर्ती कराया। भौरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला ने बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों ने बताया कि प्रसूता और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले कई सालों से वे शासन-प्रशासन से पुल बनाने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन किसी भी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं जाता। कई बार आश्वासन मिलने के बाद भी समस्या जस की तस है।

आदिवासी संगठन जयस के प्रदेश अध्यक्ष हीरालाल अलावा ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। हीरालाल अलावा ने कहा कि देश में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन गांव की नदी पर अबतक पुल नहीं बन सका है। बच्चे भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। अगर प्रशासन ने 3 दिन में पुल नहीं बनाया तो हम आंदोलन को मजबूर हो जाएंगे और इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।