Bombay HC: तबलीगी जमात पर दर्ज FIR बाम्बे हाईकोर्ट ने की खारिज

Coronavirus India: बाम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि Tablighi Jamaat के खिलाफ मीडिया का दुष्प्रचार अनुचित, एफआईआर रद्द

Updated: Sep 24, 2020 06:52 PM IST

Bombay HC: तबलीगी जमात पर दर्ज FIR बाम्बे हाईकोर्ट ने की खारिज
Photo Courtesy: Scroll

मुंबई। कोरोना संक्रमण और तबलीगी जमात से जुड़े मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तबलीगी जमात के लोगों को बलि का बकरा बनाया गया और मीडिया ने उनके खिलाफ दुष्प्रचार फैलाया।

बॉम्बे हाई कोर्ट में तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ महमारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, आपदा प्रबंधन नियम, और विदेशी नागरिक अधिनियम के खिलाफ दर्ज याचिका पर सुनवाई हो रही थी। फैसला जस्टिस टीवी नलवाडे और जस्टिस एमजी सेविलकर ने सुनाया। 

Prashant Bhushan: न्यायपालिका का भ्रष्टाचार साबित करने का मौका दें

फैसले की मुख्य बातें

जब भी कोई प्राकृतिक आपदा या महामारी आती है तो एक सरकार बलि के बकरे खोजती है। परिस्थितियां यह बताती हैं कि संभव है कि विदेश से आए इन लोगों को बलि का बकरा बनाया गया।

वीजा शर्तों में विदेशी नागरिकों के धार्मिक प्रवचनों और गतिविधियों में भाग लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मरकज में शामिल विदेशियों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाया गया। यह दिखाने की कोशिश की गई कि विदेश से आए यह लोग कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। मीडिया का यह दुष्प्रचार अनुचित था।

विदेश से आए ये लोग पहले ही बहुत ज्यादा परेशान किए जा चुके हैं। अब उन्हें जल्द से जल्द अपने घर लौट जाने की इजाजत होनी चाहिए।

रिकॉर्ड से कहीं भी यह नहीं पता चलता कि तबलीगी जमात के लोगों का इरादा लोगों का धर्मांतरण कराने का था। बल्कि यह पता चलता है कि वे धर्म सुधार के लिए आए थे। हर धर्म सुधारों के साथ विकसित हुआ है। सुधार हमेशा आवश्यक हैं।

भारत में संक्रमण के नए आंकड़े बताते हैं कि इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। अब इसकी भरपाई के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। इन विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले अधिकांश मुसलमान थे। उनका मानना है कि सीएए और एनआरसी मुसलमानों के खिलाफ हैं। यह कहा जा सकता है कि विदेशी नागरिकों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने उन मुसलमानों के मन में भय भर दिया है। इस कार्रवाई ने अप्रत्यक्ष तरीके से यह संदेश दिया है कि किसी भी चीज के लिए मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई से द्वेष की बू आ रही है।