भिंड जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की खुली पोल, प्रसूता ने खुले में दिया बच्चे को जन्म

भिंड जिला अस्पताल में लापरवाही के कारण मोरा गांव की प्रसूता प्रियंका ने लेबर रूम में भर्ती न मिलने पर खुले में बच्चे को जन्म दिया। समाजसेवी रानी जैन ने अन्य महिलाओं के साथ पर्दा बनाकर प्रसव कराया। परिजनों ने स्टाफ पर देरी का आरोप लगाया, जबकि RMO ने आरोपों को खारिज किया।

Publish: Nov 18, 2025, 05:42 PM IST

Photo Courtesy: DB
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भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिला अस्पताल से गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां लेबर रूम में समय पर प्रवेश न मिलने के कारण मोरा गांव की प्रसूता प्रियंका ने अस्पताल परिसर में खुले स्थान पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। मंगलवार को हुई इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा बढ़ने के बावजूद स्टाफ की देरी के कारण प्रसूता को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी और बाहर ही डिलीवरी कराना पड़ी।

अटेर के मोरा गांव की प्रियंका को परिजन प्रसव पीड़ा बढ़ने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे लेकिन परिवार का आरोप है कि लेबर रूम के स्टाफ ने उसे समय रहते अंदर नहीं लिया। जैसे-जैसे पीड़ा तेज होती गई प्रसूता वहीं खुले स्थान पर लेट गई और कुछ ही मिनटों में प्रसव प्रक्रिया शुरू हो गई। आसपास मौजूद लोग देखते रहे लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया।

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इस बीच, वहां मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता रानी जैन ने स्थिति संभाली। उन्होंने बताया कि प्रसूता को खुले में दर्द से तड़पते देख उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर को तुरंत कॉल किया लेकिन स्टाफ पहुंचने से पहले ही डिलीवरी शुरू हो चुकी थी। ऐसे में उन्होंने अन्य महिलाओं की मदद से साड़ी का पर्दा बनाकर प्रसूता को ढका और पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी कराई। रानी जैन का कहना है कि अगर अस्पताल स्टाफ समय पर पहुंच जाता तो यह स्थिति टाली जा सकती थी।

प्रसव होने के थोड़ी देर बाद लेबर रूम की महिला कर्मचारी मौके पर पहुंचीं। इसके बाद जच्चा-बच्चा को वार्ड में ले जाकर प्राथमिक उपचार की गई। परिजनों और समाजसेवी ने अस्पताल पर स्पष्ट लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि अस्पताल की देरी ने प्रसूता और नवजात दोनों की जान जोखिम में डाल दी थी।

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हालांकि, जिला अस्पताल के RMO आर.एस. कुशवाह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि लेबर रूम का स्टाफ समय पर पहुंचा था और स्थिति अचानक बनने के कारण बाहर ही प्रसव करना पड़ा। लेकिन परिवार और गवाहों का दावा है कि मेडिकल टीम काफी देर बाद आई। इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रसूता के साथ हुई यह घटना जनता की सुरक्षा और सरकारी अस्पतालों में मातृ-शिशु सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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