मऊगंज में नल जल योजना में भ्रष्टाचार, बिना काम सैंक्शन हुए 3.85 करोड़ रुपए, अधिकारियों पर FIR दर्ज

मऊगंज में जल जीवन मिशन में करीब 3.85 करोड़ रुपये के घोटाले पर EOW ने बड़ी कार्रवाई की है। बिना काम पूरा हुए भुगतान करने और घटिया निर्माण पर तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, दो इंजीनियरों और ठेकेदार पर FIR दर्ज हुई है।

Updated: Sep 24, 2026, 03:21 PM IST

मऊगंज। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत संचालित नल जल योजनाओं में करोड़ों रुपये के भुगतान के बावजूद निर्माण कार्य अधूरे मिलने और गुणवत्ता पर सवाल उठने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने FIR दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि नईगढ़ी विकासखंड के अलग-अलग गांवों में योजना के लिए निर्धारित काम पूरा होने से पहले ही करीब 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कई स्थानों पर पानी की टंकी, पाइपलाइन, पंप और घरेलू नल कनेक्शन से जुड़े काम अधूरे मिले हैं। जबकि, कुछ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में है।

यह मामला साल 2021-22 में शुरू हुई उन नल-जल योजनाओं से जुड़ा है। इनका उद्देश्य गांवों में पानी की टंकियां बनाकर पाइपलाइन के जरिए घर-घर जल पहुंचाना था। योजना के तहत ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन, पंप हाउस, सबमर्सिबल मोटर, घरेलू नल कनेक्शन और अन्य जरूरी निर्माण कार्य किए जाने थे। निर्धारित समयसीमा के अनुसार, काम करीब नौ महीने में पूरा किया जाना था लेकिन जांच में करीब पांच साल बाद भी कई परियोजनाएं अधूरी पाई गईं और संबंधित गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।

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जांच के दौरान खटखरी गांव में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई। वहां बनाई गई पानी की टंकी पहली बार पानी भरने के दौरान ही ढह गई। वहीं, कई अन्य गांवों में मुख्य पाइपलाइन तो बिछाई गई थी लेकिन वह आबादी या गांव के बाहरी हिस्से तक ही सीमित रह गई। साथ ही घरों में नल की फिटिंग और सर्कुलर स्टैंड पोस्ट जैसे जरूरी काम भी कई स्थानों पर नहीं मिले।

करह उर्फ खैरागढ़ गांव में जांच के दौरान पांच मोटर पंप लगाए जाने के स्थान पर केवल एक सबमर्सिबल मोटर मिलने की बात सामने आई। इसी तरह योजना के तहत 740 घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया गया था लेकिन मौके पर घरों में नल फिटिंग नहीं मिली।

शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का निर्माण अधूरा पाया गया। वहीं, जुड़मनिया रघुनाथ में मुख्य पाइपलाइन भी पूरे गांव तक नहीं पहुंची थी और करीब आधे हिस्से तक ही पाइपलाइन बिछी मिली। इन परिस्थितियों ने योजना के लिए किए गए भुगतान और वास्तविक निर्माण कार्य के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामले में EOW ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जे.पी. द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पाण्डेय, उपयंत्री ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अब EOW की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्यों की निगरानी किस स्तर पर हुई, अधूरे और कथित तौर पर गुणवत्ताहीन काम के बावजूद भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ और इसमें संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदार की क्या भूमिका थी। जांच एजेंसी भुगतान प्रक्रिया, निर्माण की वास्तविक स्थिति और कार्य की गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य तथ्यों की पड़ताल करेगी।

FIR दर्ज होने के बाद मामले ने प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि ग्रामीणों को योजना के अनुसार पेयजल सुविधा नहीं मिली तो भुगतान प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने को लेकर जांच अहम मानी जा रही है। अब EOW की विवेचना से यह स्पष्ट होगा कि नल-जल योजना में वित्तीय भुगतान और जमीन पर हुए निर्माण के बीच सामने आए अंतर के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

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