दवाओं की जमाखोरी पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, किल्लत है तो नेताओं को कैसे मिल रही हैं दवाएं

दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल माफिया और राजनेताओं के बीच सांठ-गांठ की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को कहा है कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच करें

Updated: May 17, 2021, 06:51 PM IST

दवाओं की जमाखोरी पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, किल्लत है तो नेताओं को कैसे मिल रही हैं दवाएं
Photo Courtesy: DNA India

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल माफिया और राजनेताओं के बीच साठगांठ की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने पूछा है कि जब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बाद भी आम लोगों को दवा नहीं मिल पा रही हैं, तब बीजेपी सांसद गौतम गंभीर तक दवाएं कैसे पहुंच रही हैं। उच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बीजेपी सांसद गौतम गंभीर, यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी, आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय को कोरोना से जुड़ी दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी मामले में क्लीन चीट दे दी थी। पुलिस ने हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश कर कहा था कि ये सभी नेता सिर्फ लोगों की मदद कर रहे थे। ये नेता दवाओं का प्रबंध जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए वालंटियर के तौर पर कर रहे हैं।

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दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि इसमें नेताओं का कोई निजी फायदा नहीं है, बल्कि अधिकांश जीवनरक्षक दवाइयां ये मुफ्त में मरीजों को दे रहे हैं। पुलिस ने कहा, 'दवाएं, ऑक्सीजन, प्लाज़्मा और अस्पताल में बेड उपलब्ध कराने के बदले इन नेताओं ने किसी से पैसे नहीं लिए। न किसी के साथ धोखाधड़ी किया। वे अपनी मर्जी से बिना भेदभाव के लोगों की मदद में जुटे हुए हैं।' दिल्ली पुलिस के इस तर्क पर हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा, 'ये कैसे कहा जा सकता है की जमाखोरी नहीं हुई। पुलिस इस निष्कर्ष तक खुद कैसे पहुंच गई।'

हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या इन नेताओं ने दवाओं के खरीदने के बिल दिखाए थे? इसपर पुलिस ने बताया कि कुछ बिल दिखाए थे, सबके नहीं। न्यायालय ने कहा कि यदि ये नेता जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं तो उनके पास दवाओं का जितना स्टॉक बचा हुआ है उन्हें स्वास्थ्य विभाग को सौंप दें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसे लोगों में बांट दिया जाएगा। मदद का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है। 

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हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश की वह इस मामले में पूरी जांच करे कि राजनेताओं को दवाएं कौन मुहैया करा रहा है। साथ ही एक हफ्ते के भीतर दुबारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को बोला है। उच्च न्यायालय ने नेताओं से कहा है कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते राजनीतिक फायदे से ऊपर उठना चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 24 मई को तय किया गया है।