किसानों का आज दिल्ली जाम करने का एलान,  सरकार कर सकती है नई पहल

Farmers Protest Update: अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर की देर रात हुई बैठक में किसान आंदोलन के मसले पर विचार, सूत्रों के मुताबिक बिना शर्त वार्ता भी संभव

Updated: Nov 30, 2020, 07:32 PM IST

किसानों का आज दिल्ली जाम करने का एलान,  सरकार कर सकती है नई पहल
Photo Courtesy: Live Hindustan

नई दिल्ली। नए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने आज दिल्ली की तरफ आने वाले सभी पांच एंट्री प्वाइंट्स को बंद करने का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सरकार की तरफ़ से रखी गई इस शर्त को भी नामंज़ूर कर दिया है कि बातचीत तभी शुरू की जाएगी जब वे बुराड़ी के निरंकारी मैदान में जाकर प्रदर्शन करेंगे।किसान संगठनों के नेताओं ने कहा है कि बुराड़ी कोई प्रदर्शन करने की जगह नहीं, बल्कि खुली जेल है।

मोदी सरकार के बनाए नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछले चार दिन से प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने कहा कि वे कोई सशर्त बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि वे राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले सभी पांच प्रवेश मार्गो को बंद कर देंगे। बता दें कि रविवार तक सिर्फ सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर ब्लॉक थे, मगर अब किसान गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद से देश की राजधानी को जोड़ने वाले हाईवे भी जाम करने की चेतावनी दे रहे हैं।

जेपी नड्डा के घर देर रात बैठक

इस बीच, किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार देर रात गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है। क़रीब दो घंटे तक चली इस बैठक में किसान आंदोलनकारियों के सख्त रुख को देखते हुए सभी संभावित उपायों पर बैठक में चर्चा की गई है। कहा ये भी जा रहा है कि सरकार इस मामले का हल निकालने के लिए आज कोई महत्वपूर्ण पहल कर सकती है। मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों के अनुसार, किसानों के आंदोलन को जल्द समाप्त करने के लिए सरकार आंदोलनकारियों से बिना शर्त चर्चा के लिए भी तैयार हो सकती है।

किसानों के 30 से अधिक संगठनों की रविवार को हुई बैठक में किसानों के बुराड़ी मैदान पहुंचने पर 3 दिसंबर से पहले वार्ता की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पेशकश पर बातचीत की गयी, लेकिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकारने से मना कर दिया। किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें मोदी सरकार की यह शर्त स्वीकार नहीं है कि वे प्रदर्शन स्थल बदल दें। उन्होंने दावा किया कि बुराड़ी मैदान एक 'खुली जेल' है। विपक्षी पार्टियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि सरकार को किसानों के साथ बिना शर्त बातचीत शुरू करनी चाहिए।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुरजीत एस फूल ने कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा रखी गई शर्त हमें स्वीकार नहीं है। हम कोई सशर्त बातचीत नहीं करेंगे। हम सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं। घेराव खत्म नहीं होगा। हम दिल्ली में प्रवेश के सभी पांच रास्तों को बंद करेंगे।' उन्होंने कहा, 'बातचीत के लिए शर्त किसानों का अपमान है। हम कभी बुराड़ी नहीं जाएंगे। वह पार्क नहीं है बल्कि खुली जेल है।'  

आपको बता दें कि अमित शाह के बुराड़ी जाने पर जल्दी वार्ता की अमित शाह की पेशकश के बाद केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने 32 किसान संगठनों को एक पत्र भेजा था, जिसमें ठंड के मौसम और कोविड-19 की परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें बुराड़ी मैदान जाने को कहा गया था। भल्ला ने लिखा था, 'मैं आपसे निवेदन करता हूं कि सभी किसानों को लेकर आप दिल्ली की सीमा से बुराड़ी मैदान पहुंचें, जहां उनके लिए सभी सुविधाओं का प्रबंध किया गया है और वे शांतिपूर्वक अपना विरोध-प्रदर्शन करें तथा पुलिस इसकी अनुमति देगी।

इस बीच किसान नेताओं ने दावा किया है कि हरियाणा और पंजाब से और अधिक प्रदर्शनकारी आंदोलन में शामिल होंगे। हरियाणा के दादरी से निर्दलीय विधायक और 'सांगवान खाप के प्रमुख सोमबीर सांगवान ने कहा कि हरियाणा की अनेक खापों ने किसानों के प्रदर्शन को समर्थन दिया है और वे राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च करेंगे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच किसान दिल्ली की सीमाओं पर सरकार के खिलाफ नारे लगा कर अपना विरोध जता रहे हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) प्रदर्शन कर रहे किसानों को भोजन मुहैया करा रही है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात में नए कानूनों का किया बचाव

रविवार को प्रधानमंत्री ने अपने 'मन की बात कार्यक्रम में कहा कि 'भारत में खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ नए आयाम जुड़ रहे हैं। बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।' उन्होंने कहा, 'किसानों की वर्षों से कुछ मांगें थीं और उन्हें पूरा करने के लिए हर राजनीतिक दल ने कभी न कभी वादा किया था, लेकिन वे कभी पूरी नहीं हुईं।' प्रधानमंत्री ने कहा, 'संसद ने काफी विचार-विमर्श के बाद कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और अवसर भी मिले हैं। इन अधिकारों ने बहुत कम समय में किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है।'