Priyanka Gandhi: यूपी में गन्ना किसानों के हज़ारों करोड़ बकाया, पर्ची पर नहीं लिखा जा रहा दाम

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर साधा निशाना, प्रदेश में किसानों के गन्ने का 10 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का लगाया आरोप

Updated: Feb 13, 2021, 08:31 PM IST

Priyanka Gandhi: यूपी में गन्ना किसानों के हज़ारों करोड़ बकाया, पर्ची पर नहीं लिखा जा रहा दाम
Photo Courtesy : The financial express

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर प्रदेश के किसानों की दुर्गति करने का गंभीर आरोप लगाया है। दरअसल उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें किसानों से गन्ना तो खरीद रही हैं, लेकिन पर्ची में एमएसपी की जगह कुछ नहीं लिखा जा रहा है। यानी फसल खरीदते वक्त किसानों को यह नहीं बताया जा रहा है कि उन्हें इस साल गन्ने के लिए कितना दाम दिया जाएगा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मसले को उठाते हुए ट्वीट किया है, 'काले कानूनों में किसान हितों का दावा करने वाली भाजपा ने यूपी के गन्ना किसानों की दुर्गति कर दी है। वादा था 14 दिन में भुगतान का लेकिन किसानों के गन्ने का 10,000 करोड़ भुगतान बकाया है। 2017 से गन्ना मूल्य में जीरो वृद्धि हुई है और इस साल तो गन्ना पर्ची पर मूल्य ही नहीं है।' 

इसके साथ ही प्रियंका गांधी ने हिंदी न्यूज़ चैनल एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट का एक वीडियो भी साझा किया है जिसमें बताया गया है कि गन्ना किसानों की परिस्थितियां कैसी हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने राज्य की  चीनी मिलों को हजारों क्विंटल गन्ना दे दिया है लेकिन उन्हें अपनी ही फसल की कीमत नहीं पता है। गन्ना खरीदने वाली मिल की तरफ से जो पर्ची मिली है उसमें राज्य समर्थित मूल्य की जगह जीरो-जीरो लिखा है। यानी किसानों को यही नहीं पता है कि किस दाम पर वे गन्ना बेच रहे हैं।

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गन्ना किसान पिछले दो महीने से गन्ना बेच रहे हैं और इंतजार कर रहे हैं कि सरकार गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे। इसी बीच किसानों को इस बात की भी आशंका है कि सरकार किसान आंदोलन को देखते हुए मोलतोल करना न शुरू कर दे। नियम के मुताबिक किसानों को यदि 15 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान नहीं किया जाता तो उन्हें ब्याज दिया जाएगा। लेकिन यहां तो किसानों को मिलों में गन्ना तुलवाने के दो महीने बाद भी पेमेंट तो दूर, उन्हें यह भी नहीं पता कि फसल किस भाव में खरीदी गई है।

इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य तय नहीं किया है, इसीलिए पर्ची पर जीरो-जीरो या एसएपी लिखा आ रहा है। सरकार जब दाम तय करेगी, तब किसानों को उसी हिसाब से भुगतान किया जाएगा। किसानों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से गन्ने के समर्थन मूल्य में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई है। इतना ही नहीं, बहुत से किसानों को तो यह आशंका भी सता रही है कि कहीं सरकार इस बार दाम बढ़ाने की बजाय कहीं घटा न दे।