रिलायंस के बयान में किसानों का ग़ुस्सा दूर करने की कोशिश, मोबाइल टावर्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट पहुंची

रिलायंस ने बयान जारी करके किया दावा, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से हमारा कोई लेना देना नहीं, भविष्य में भी ऐसा करने का इरादा नहीं, कंपनी ने कम दाम पर कृषि उपज ख़रीदने के करार नहीं किए

Updated: Jan 04, 2021, 08:51 PM IST

रिलायंस के बयान में किसानों का ग़ुस्सा दूर करने की कोशिश, मोबाइल टावर्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट पहुंची
Photo Courtesy : Business Today

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के निशाने पर चल रहे रिलायंस ग्रुप ने एक बयान जारी करके किसानों के गुस्से को कम करने की कोशिश की है। साथ ही कंपनी ने रिलायंस जिओ के टावर्स और कर्मचारियों को सुरक्षा दिलाने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। दरअसल, मोदी सरकार के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी के करीबी समझे जाने वाले मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी के उद्योग समूह की कंपनियों और उत्पादों के बहिष्कार का एलान किया हुआ है।

खासतौर पर रिलायंस जिओ के मोबाइल सिम को दूसरी कंपनियों में पोर्ट कराने और जिओ के मोबाइल टावर्स को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरें भी बड़े पैमाने पर आई हैं। यही वजह है कि अब कंपनी ने अदालत की शरण ली है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट दायर याचिका में रिलायंस ने अपनी प्रॉपर्टी और कर्मचारियों को नुकसान से बचाए जाने का अनुरोध किया है। 

रिलायंस की तरफ से दायर याचिका में कंपनी ने यह भी दावा किया है कि इस तोड़फोड़ के पीछे उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का हाथ है। रिलायंस दूरसंचार विभाग से भी ऐसी शिकायत पहले ही कर चुकी है। कंपनी ने अपनी शिकायत में किसी कंपनी का नाम नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि उसका इशारा भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की तरफ है, क्योंकि भारतीय बाज़ार में जिओ का मुकाबला इन्हीं दो कंपनियों से है। हालांकि एयरटेल और वोडाफोन आईडिया रिलायंस के इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर चुकी हैं। इन कंपनियों ने भी इस आरोप के जवाब में अपनी तरफ से दूरसंचार विभाग को चिट्ठी भेजी है।

किसानों के सामने भी रखा अपना पक्ष

लगातार बढ़ रहे विरोध को देखते हुए रिलायंस ने किसानों की नाराज़गी दूर करने की कोशिश भी की है। कंपनी की तरफ से जारी बयान में दावा किया गया है कि रिलायंस समूह की कोई भी कंपनी कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में शामिल नहीं है। बयान में यर भी कहा गया है कि रिलायंस समूह की किसी भी कंपनी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती की कोई भी जमीन हरियाणा/पंजाब या देश के किसी दूसरे हिस्से में नहीं खरीदी है। कंपनी ने यह भी कहा है कि भविष्य में भी ऐसा करने की उसकी कोई योजना नहीं है।

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हमने किसानों का शोषण नहीं किया: रिलायंस

रिलायंस के बयान में दावा किया गया है कि वो किसानों का शोषण नहीं करती, बल्कि देश के किसानों को और मज़बूत बनाने के लिए काम कर रही है। बयान में कहा गया है, '130 करोड़ भारतीयों का पेट भरने वाले किसान अन्नदाता हैं और उनका हम सम्मान करते हैं। रिलायंस और उसके सहयोगी किसान को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए कंपनी और उसके सहयोगी कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ पैदा की गई उनकी उपज का किसानों को उचित और लाभदायक मूल्य मिले इसका पूरा समर्थन करते है। रिलायंस स्थायी आधार पर किसानों की आय में वृद्धि चाहता है, और इस लक्ष्य के लिए काम करने को प्रतिबद्ध है।' कंपनी के बयान में दावा किया गया है कि उसने कृषि उपज की कम कीमत पर खरीद के दीर्घकालिक समझौते कभी नहीं किए और उसके सप्लायर्स भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे खरीद नहीं करते हैं।