लोकसभा में 543 की जगह 850 सांसद होंगे, सांसदों को दिए गए नए बिलों के मसौदे
सांसदों को सौंपे गए तीन नए विधेयक स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार लोकसभा की ताकत 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी में है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें प्रस्तावित हैं।
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी में है। सरकार इस बदलाव के लिए संविधान में संशोधन करेगी। इसके लिए संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल को बुलाया गया है। इस सत्र में इन तीन बिलों को पेश किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसका मसौदा सभी सांसदों के साथ साझा कर दिया है।
ड्राफ्ट बिल के प्रस्ताव के मुताबिक, 850 में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए 16 अप्रैल से संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा होगी। इस बिल को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है।
बिल में सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने की बात कही गई है। फिलहाल आधिकारिक जनसंख्या आंकड़े 2011 जनगणना के ही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
इस बिल का कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे। महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' सितंबर 2023 में पास हो चुका है। लेकिन अब कानून को संशोधन कर इसे 2029 से ही लागू किया जाएगा। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।




