चीन में AI से हुई बिना लक्षण वाले पैंक्रियाज कैंसर की पहचान, इसी से हुई थी एपल के CEO की मौत

चीन में AI तकनीक ने डायबिटीज जांच के दौरान 57 वर्षीय मजदूर में शुरुआती स्टेज का पैंक्रियाज कैंसर पकड़ लिया। नॉन-कॉन्ट्रास्ट CT स्कैन और डेटा पैटर्न से AI ने बीमारी पहचानी। समय पर ऑपरेशन हुआ और मरीज की जान बच गई।

Updated: Jan 03, 2026, 11:16 AM IST

चीन। चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तकनीक समय पर सही संकेत दे दे तो सबसे घातक बीमारी को भी हराया जा सकता है। 57 वर्षीय मजदूर किउ सिजुन डायबिटीज की सामान्य जांच कराकर घर लौटे ही थे कि तीन दिन बाद हॉस्पिटल से उन्हें एक फोन आया। इस फोन कॉल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत दोबारा बुलाया और बताया कि जांच में उन्हें पैंक्रियाज (अग्नाशय) कैंसर निकला है। हालांकि, कैंसर फिलहाल बेहद शुरुआती अवस्था में है।

यही शुरुआती पहचान उनकी जान बचाने की वजह बनी। डॉक्टरों ने बिना देर किए ऑपरेशन कर ट्यूमर निकाल दिया। यह संभव हो पाया हॉस्पिटल में चल रहे एक AI आधारित सिस्टम की वजह से जिसने सामान्य डायबिटीज टेस्ट और पुराने मेडिकल डेटा में छिपे असामान्य पैटर्न को पहचान लिया था।

पैंक्रियाज कैंसर को दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में गिना जाता है। आंकड़े बताते हैं कि इसके केवल करीब 10 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि इसके लक्षण बहुत देर से सामने आते हैं और तब तक कैंसर काफी फैल चुका होता है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की मौत भी इसी कैंसर से हुई थी।

AI की मदद से पैंक्रियाज कैंसर की पहचान का यह पहला मामला नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में पिछले कुछ वर्षों से ऐसे AI टूल्स पर रिसर्च चल रही है जो CT स्कैन, MRI, ब्लड टेस्ट पैटर्न और मेडिकल रिकॉर्ड के जरिए इस कैंसर को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन रूटीन डायबिटीज जांच के डेटा से इतनी शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ लेना मेडिकल साइंस के लिए असाधारण माना जा रहा है।

इस केस की सबसे अहम बात यह रही कि मरीज कैंसर के किसी शक के बिना सिर्फ डायबिटीज टेस्ट कराने गया था। AI सिस्टम ने पुराने टेस्ट डेटा में ऐसे पैटर्न पकड़े जिन्हें इंसानी आंखें आमतौर पर नजरअंदाज कर देती हैं। कैंसर इतनी शुरुआती अवस्था में मिला कि ऑपरेशन संभव हो सका। जबकि, आम तौर पर इस स्टेज पर बीमारी पकड़ में ही नहीं आती।

पैंक्रियाज कैंसर की जांच में इस्तेमाल होने वाले कॉन्ट्रास्ट CT स्कैन में रेडिएशन ज्यादा होता है। इसी कारण बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की सलाह कई एक्सपर्ट्स नहीं देते। दूसरी तरफ कम रेडिएशन वाले नॉन-कॉन्ट्रास्ट CT स्कैन में गड़बड़ी साफ नजर नहीं आती जिससे रेडियोलॉजिस्ट के लिए बीमारी पहचानना मुश्किल हो जाता है। AI ने इसी चुनौती को खत्म किया है। यह सिस्टम ऐसे सूक्ष्म बदलाव पहचान रहा है जो अक्सर अनुभवी डॉक्टरों से भी छूट जाते हैं।

चीन के निंगबो यूनिवर्सिटी से जुड़े पीपुल्स हॉस्पिटल में इस्तेमाल हो रहा यह AI टूल PANDA कहलाता है। इसका पूरा नाम Pancreatic Cancer Detection with Artificial Intelligence है। नवंबर 2024 से इसे क्लिनिकल ट्रायल के तहत लागू किया गया है। अब तक यह सिस्टम 1 लाख 80 हजार से ज्यादा पेट और सीने के CT स्कैन का विश्लेषण कर चुका है।