जी भाईसाहब जी:बीजेपी सांसद को रास नहीं आ रहा डिप्टी सीएम का सिस्टम
MP Politics: सांसद जर्नादन मिश्रा और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला की राजनीतिक टसल जगजाहिर है। ताजा बयान भी इसी राजनीतिक वर्चस्व और प्रतिद्वंद्विता का एक हिस्सा माना जा रहा है।
रीवा की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सरकारी अस्पतालों में कथित लापरवाही को लेकर बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों पर हमला बोला है। सोमवार को मीडिया से चर्चा के दौरान सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा, “मेरा वश चले तो मैं सभी डॉक्टरों का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा दूं। इनका चिकित्सा करने का अधिकार ही समाप्त कर देना चाहिए। ये चिकित्सक नहीं हैं। ये नोट छापने की मशीन बन चुके हैं। जनता अब इन्हें भगवान नहीं, दानव के रूप में देखती है।”
सांसद का यह बयान रीवा में इलाज में लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतों से जुड़े चार हालिया मामलों के बीच आया है। इनमें मरीजों की मौत और इलाज में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला भी रीवा से भाजपा विधायक हैं। यानी अपनी ही पार्टी और उन्हीं के क्षेत्र के सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में यह बयान सीधे स्वास्थ्य मंत्री के विभाग की जवाबदेही से भी जुड़ता है।
सांसद जर्नादन मिश्रा का गुस्सा जिस सिस्टम पर निकला है उसके मुखिया उपमुख्यमंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला है। सांसद जर्नादन मिश्रा और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला की राजनीतिक टसल जगजाहिर है। ताजा बयान भी इसी राजनीतिक वर्चस्व और प्रतिद्वंद्विता का एक हिस्सा माना जा रहा है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के लिए असहज होना स्वाभाविक है क्योंकि उनके विभाग पर सवाल कोई और नहीं उनकी ही पार्टी के नेता उठा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के रहते शराब तस्करी का राज
प्रदेश सरकार की छवि चमकाने की जितनी कोशिशें होती हैं, उससे ज्यादा बदमानी अकेला आबकारी विभाग करवा देता है। सागर और देवास में अवैध शराब से मौतों के बाद अब टीआई की हत्या से शराब माफिया की हैसियत को बता दिया है। देवास में टीआई दिलीप कुमार पुरी की हत्या के बाद प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शराब माफिया द्वारा गुजरात जैसे शराबबंदी वाले राज्यों में शराब की तस्करी की जा रही थी।
इससे पहले सितंबर में सागर जिले में नकली शराब पीने से करीब 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद 'घर-घर शराब पहुंचाने' के अवैध स्थानीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ था। सिंगरौली और सागर जैसे जिलों में शराब माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत पाया गया है कि वे नियमों की धज्जियां उड़ाकर गली-मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से पैठ बना चुके हैं।
आबकारी विभाग लंबे समय से उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पास है। वे देवास के प्रभारी मंत्री भी है। बीते दिनों उनके ओएसडी दीपम रायचूरा पर शराब ठेके देने के लिए एक करोड़ की रिश्वत लेने के आरोप लगे। इसके बाद ओएडी को पहले हटाया गया फिर निलंबित किया गया है। इन सभी मामलों में आरोप उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तक पहुंचे। शराब की तस्करी मध्यप्रदेश के अंदर ही नहीं होती है बल्कि पड़ोसी राज्य गुजरात तक पहुंचाई जाती है। वह गुजरात जहां शराबबंदी है। जाहिर है यह कार्य राजनीतिक पहुंच के बिना संभव नहीं है। यही कारण है कि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विभाग की कार्य प्रणाली बदनाम जरूर है मगर विभाग के प्रभारियों तक उसकी आँच नहीं पहुंचती है।
बीजेपी युवा मोर्चा में भी दाग अच्छे हैं
एमपी बीजेपी के नेताओं पर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं। इसबीच भारतीय जनता युवा मोर्चा के 19 जिलों में अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों में भी दागदार नेताओं को पद देने का मामला सामने आ गया। 29 अक्टूबर को नियुक्तियों की घोषणा होने पर युवाओं नेताओं के प्रति राजनीतिक असंतोष ही जाहिर नहीं हुआ बल्कि उन पर लगे कई तरह के आरोप और प्रकरणों का खुलासा हुआ। बालाघाट में जिलाध्यक्ष अमन गांधी का नाम तब चर्चा में आया जब उनकी भाभी ने मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज करवाई। भाभी का आरोप है कि 29 अक्टूबर की रात नशे में अमन गांधी, उनके ससुर कुलदीप गांधी और अन्य परिजनों ने उनके और उनके पति के साथ मारपीट की और धमकी दी। उन्होंने अपने 6 वर्षीय बच्चे के लिए सुरक्षा की मांग की है।
मंडला के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना तथा 'थार' गाड़ी की मांग को लेकर पुलिस में एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया है। नर्मदापुरम में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए गए कुलदीप रघुवंशी को सीधे जिला अध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी गई। हालांकि, उनका दावा है कि पुराने मामले में वह दोषमुक्त हो चुके हैं और पार्टी में वापसी भी हो गई थी। सिवनी में योगेश शिवहरे की नियुक्ति पर संगठन की पहले से तैयार सूची को दरकिनार करने के आरोप हैं।
इंदौर ग्रामीण में लगातार तीसरी बार एक ही समाज को अध्यक्ष पद मिलने से सवाल उठे हैं। सागर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़े पुराने आयकर छापे भी चर्चा में हैं। अन्य जिलों में पैनल की अनदेखी करने और पुराने विवादित नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और नाराजगी देखने को मिल रही है। संगठन में उठ रहे सवालों में एक सवाल यह भी है कि क्या बीजेपी जिम्मेदारी सौंपने के पहले नेताओं के अतीत की पड़ताल नहीं करती है? या ये नियुक्तियां भी प्रभाव और अपने समर्थकों को पद दिलाने की राजनीति के आगे संगठन के छोटे होने जाने का प्रमाण बन गई है?
अर्जुन सिंह के बदले कौन?
सतना में धवारी क्रिकेट स्टेडियम का नाम क्या हो, इसपर बहस नगर परिषद के हाल से बाहर सोशल मीडिया पर आ गई है। बीते दिनों नगर परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्षदों के विरोध के बावजूद बहुमत के आधार पर स्टेडियम का नाम अर्जुन सिंह की जगह महापौर के पिता शंकर प्रसाद ताम्रकार के नाम पर रखने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। नाम बदलने पर तरह तरह की टिप्पणियां आ रही हैं। करीब 5 घंटे चली बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने मांग रखी कि पूर्व महापौर ममता पांडेय के कार्यकाल में एमआईसी से पास हुए प्रस्ताव के मुताबिक स्टेडियम का नाम पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह के नाम पर रखा जाए। वर्तमान परिषद ने स्टेडियम का नाम महापौर योगेश ताम्रकार के पिता स्वर्गीय शंकर प्रसाद ताम्रकार के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस की वोटिंग की मांग को खारिज करते हुए परिषद अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी ने प्रस्ताव पास होने का ऐलान कर दिया।
इस पर अब सोशल मीडिया पर बहस जारी है। पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने बयान जारी कर कहा कि स्टेडियम का नाम नहीं रखा जाना अर्जुन सिंह का ही नहीं विंध्य धरा का अपमान है। वे विंध्य के पुरोधा नेता थे। सोशल मीडिया पर कमेंट में महापौर के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कृतित्व की तुलना की जा रही है। सवाल यह भी है कि बैठक 5 घंटे चली, नाम बदलने पर विवाद होता रहा लेकिन शहर की समस्याओं से जुड़े एजेंडे पर चर्चा कराने की जगह अध्यक्ष ने सम्मेलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।




