दफ्तर दरबारी: अपनों से घिर गए ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुस्‍कान में भी कसमसाहट

MP Poliitcs: ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया जब बीजेपी में आए तो उन्‍होंने सबसे पहले केपी यादव को किनारे करवाया। मगर केपी यादव लगातार सिंधिया के खिलाफ हमलवार हैं। अब बीजेपी के दूसरे नेता भी सिंधिया को लोकसभा चुनाव हराने वाले केपी यादव को पद देने के प्रयास में लगे हैं।

Updated: Mar 18, 2026, 05:10 PM IST

हमेशा बड़ी मुस्‍कुराहट के साथ मिलने वाले केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का एक फोटो वायरल हुआ है। इस फोटो में उनकी मुस्‍कान फीकी है जबकि उनके साथ खड़े मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल खोल कर मुस्‍कुरा रहे हैं। डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की फीकी मुस्‍कान के अनेक राजनीतिक अर्थ खोजे जा रहे हैं। 

सबसे बड़ा कारण तो क्षेत्र के दूसरे दिग्‍गज नेता विधानसभा अध्‍यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के साथ जारी वर्चस्‍व का संघर्ष है। दोनों नेताओं व उनके समर्थकों में लंबे समय से वर्चस्‍व का टकराव जारी है। यहां तक कि तोमर समर्थक ग्‍वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाहा की आपत्ति के बाद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने ग्‍वालियर के स्‍थानीय मामलों में दखल देना बंद कर दिया था। यह टसल अभी भी दिखाई दे रही है। बीते सप्‍ताह जब लाड़ली बहना योजना की राशि खातों में डालने के लिए मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्‍वालियर पहुंचे तो कार्यक्रम में विधानसभा अध्‍यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे लेकिन ज्‍यों ही ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के पहुंचे तोमर आयोजन स्‍थल से अपने क्षेत्र मुरैना चले गए। 

ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की मुस्‍कान फीकी होने का एक और कारण है। यह कारण दिल में कांटे की तरह चुभ रहे बीजेपी नेता केपी यादव को तवज्‍जो मिलना है। सिंधिया 2019 का लोकसभा चुनाव भूले नहीं हैं। इस आम चुनाव में उन्‍हें अपने गढ़ कहे जाने वाले क्षेत्र गुना में तब बीजेपी के प्रत्‍याशी केपी यादव ने पराजित किया था। यह हार सिंधिया के लिए कड़वा अनुभव बन गया है। जब वे बीजेपी में आए तो उन्‍होंने सबसे पहले केपी यादव को किनारे करवाया। मगर केपी यादव चुुप नहीं बैठे। वे क्षेत्र में लगातार सिंधिया के खिलाफ हमलवार रहे हैं। अब बीजेपी के दूसरे नेता भी सिंधिया को लोकसभा चुनाव हराने वाले केपी यादव को पद देने के प्रयास में लगे हैं।

निगम-मंडलों में नियुक्ति की तैयारी के बीच चर्चा है कि सिंधिया के कट्टर विरोधी केपी यादव को कोई पद मिल जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर केपी यादव को पद दिलाने के पक्ष में, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया कतई नहीं चाहते हैं कि केपी यादव को भाजपा में जरा भी तवज्‍जो मिले। यादव वोट को ध्‍यान में रखते हुए वे ब्रजेन्द्र यादव का समर्थन कर रहे हैं। अपने समर्थक को आगे बढ़ाना तथा विरोधी को रोकने में वे पूरी ताकत लगा रहे हैं। 

बीजेपी नेता पुत्रों की एजुकेशन पॉलिटिक्स

राजनीति में वंश परम्परा आगे बढ़ाने को इच्छुक दो नेता पुत्रों ने शिक्षा को अपना साधन बनाया है। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर जिले में नया निजी विश्व विद्यालय शुरू किया है। ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी की स्‍थापनाा मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के पुत्र आदित्य सिंह राजपूत द्वारा की गई हैं। वे इस यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी सागर जिले और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में वरदान साबित होगी। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सागर में ही उपलब्ध हो सकेगी। साथ प्रतिवर्ष रोजगार मेले एवं प्लेसमेंट के माध्यम से युवाओं का रोजगार के अवसर पर उपलब्ध होंगे।  

दूसरी तरफ, अपने जन्‍मदिन पर 5 मार्च को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा, रायसेन और सीहोर जिले के भैरूंदा में 'मामा कोचिंग' शुरू करने की घोषणा की थी। मामाा कोचिंग में विदिशा संसदीय क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री में कोचिंग दी जाएगी। इसमें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं शामिल हैं। कोचिंग ऑनलाइन भी होगी ताकि जो छात्र सेंटर तक नहीं आ पा रहे हैं, वे अपने घर पर रहकर इसका फायदा ले सकें। गृह क्षेत्र भैरूंदा में 100 स्टूडेंट्स का पहला बैच शुरू हो गया है। इसकी कमान शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने संभाल रखी है। कार्तिकेय सिंह बुधनी से विधानसभा चुनाव लड़ने के उत्‍सुक हैं। पिछले चुनाव में जिला संगठन ने उनके नाम को टिकट देने के लिए प्रस्‍तावित किया था। 

दोनों नेता पुत्र क्रिकेट के बाद अब शिक्षा की पिच से पॉलिटिक्स की बॉल को बाउंड्री पार भेजने का इरादा रखते हैं।

आ गए, आ गए...वे आ गए 

मध्य प्रदेश के दो वरिष्ठ मंत्री हैं, कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल। दोनों सरकार से नाराज बताए जाते हैं। उनकी नाराजगी बयानों और क्रियाकलापों में जब-तब जाहिर हो जाती है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के तीखे तेवर उजागर हुए थे। इसके बाद दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के फोटो वायरल हुए थे। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अमित शाह से मुलाकात के बाद दोनों मंत्रियों कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को दिल्‍ली बुलवाया गया था। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकात की थी।

 इस मुलाकात के बाद दोनों मंत्री दो कैबिनेट मीटिंग से गायब रहे, जबकि उनके सामान्‍य कार्यक्रम जारी थे। कयास लगाए गए कि दिल्‍ली से कोई संदेश मिला है। राजनीति की हांडी में कुछ पक रहा हैं तभी दोनों नेताओं ने कैबिनेट से दूरी रखी। मंगलवार को तीसरी कैबिनेट बैठक में नजरें लगी थीं कि दोनों मंत्री आएंगे या नहीं। तभी अचानक हल्ला हुआ, आ गए, आ गए। मीडियोकर्मियों ने देखा कि दोनों मंत्री बैठक में शामिल हुए हैं। 

कौन झुका और किसके मन की हुईह है, संगठन ने नेताओं के इस संघर्ष में किस का पक्ष लिया है यह अलग बात है लेकिन मुख्यमंत्री से अलग-अलग भेंट और बात के बाद कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल कैबिनेट में शामिल हो चुके हैं। अब जब वे बैठक में आ गए हैं तो माना जा रहा है कि उनका गुस्सा चला गया है। बाकी राजनीति की हांडी में क्‍या पक रहा है, इसका खुलासा भी जल्‍द हो जाएगा। 

संघ का प्रयोग, और करीब की राजनीति

अपने शताब्‍दी वर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुछ बड़े बदलाव कर रहा है। नई व्‍यवस्‍था में अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। अभी मध्‍य प्रदेश में आरएसएस के तीन संगठन प्रांत हैं, मध्‍य भारत, मालवा और महाकौशल। इन प्रांतों के प्रमुख प्रचारक संगठन की व्‍यवस्‍था देखते हैं। अब तय किया गया है कि प्रांत की जगह प्रदेश में  संभाग प्रचारकों की नियुक्ति होगी। अब पूरे प्रदेश की कमान एक 'प्रदेश प्रचारक' के हाथ में होगी, जबकि 9 नए संभाग में संभागीय प्रचारक बनाए जाएंगे।

इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम में एक-एक संभागीय प्रचारक के साथ 30-30 पदाधिकारियों की एक कार्यकारी टीम भी तैनात की जाएगी। प्रतिनिधि सभा की बैठक में लिए गए इस निर्णय का उद्देश्‍य “युवा शक्ति और सांगठनिक विस्तार” के संकल्प को पूरा करना है। साफ है कि नया निर्णय प्रदेश में संघ के राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाएगा।