कफ सिरप की बिक्री पर केंद्र सरकार सख्त, अब बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगी दवा

केंद्र सरकार ने कफ सिरप समेत सभी सिरप आधारित दवाओं की गुणवत्ता और बिक्री पर नियम सख्त कर दिए हैं। सरकार ने इन्हें ड्रग्स रूल्स 1945 की छूट सूची (Schedule-K) से हमेशा के लिए बाहर कर दिया है।

Updated: Jun 16, 2026, 05:15 PM IST

केंद्र सरकार ने कफ सिरप समेत सिरप आधारित दवाओं की बिक्री और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ड्रग्स नियमों में संशोधन करते हुए सरकार ने ऐसी दवाओं को उन श्रेणियों से बाहर कर दिया है जिनके तहत कुछ दवाएं बिना विशेष नियामकीय शर्तों के बाजार में उपलब्ध कराई जा सकती थी। नए प्रावधानों के बाद सिरप आधारित दवाओं के निर्माण, वितरण और बिक्री पर निगरानी और अधिक कड़ी होगी तथा संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं को लाइसेंसिंग एवं गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव ड्रग्स रूल्स 1945 की अनुसूची-K में संशोधन के जरिए किया गया है। अनुसूची-K में उन दवाओं और उत्पादों को शामिल किया जाता था जिन्हें कुछ नियामकीय प्रावधानों में छूट प्राप्त थी। अब सिरप आधारित दवाओं को इस सूची से हटा दिया गया है। जिससे इनके उत्पादन और बाजार में उपलब्धता से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक कठोर हो जाएंगे।

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सरकार ने बताया कि नियमों में बदलाव लागू करने से पहले 29 दिसंबर 2025 को मसौदा अधिसूचना जारी कर आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई थी। इसके अलावा देश की सर्वोच्च वैधानिक तकनीकी सलाहकार संस्था ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) से भी परामर्श लिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 12 और 33 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए संशोधित नियमों को अधिसूचित किया।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले कुछ सालों में कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर मामले सामने आए हैं। साल 2022-23 के दौरान भारतीय कफ सिरप से जुड़े विवादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की थी। अफ्रीकी देशों और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत के मामलों के बाद भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता व्यवस्था पर सवाल उठे थे। जिसके चलते केंद्र सरकार ने निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए थे।

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इन्हीं घटनाओं के बाद सरकार ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी प्रयोगशालाओं में अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था लागू की थी। साथ ही दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के मानकों को और सख्त बनाया गया था। गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, कुछ निर्माण इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए गए तथा राज्यों और केंद्र के ड्रग कंट्रोल विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण भी बढ़ाए गए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिरप आधारित दवाओं के निर्माण में विभिन्न प्रकार के तरल पदार्थ, फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य रासायनिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण या परिवहन में थोड़ी सी लापरवाही भी दवा की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सरकार द्वारा इन्हें छूट प्राप्त श्रेणी से बाहर करना दवा सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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सिरप दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई थी जब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अक्टूबर 2025 में कथित रूप से दूषित कफ सिरप के सेवन से 26 बच्चों की मौत हो गई थी। मामले की जांच के दौरान बच्चों की मौत से जुड़े कोल्ड्रिफ कफ सिरप का निर्माण करने वाली श्रीसन फार्मा कंपनी पर कार्रवाई की गई और कंपनी के निदेशक गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई थी।