जी भाईसाहब जी: ज्योतिरादित्य सिंधिया का दाैरा पूरा फिल्मी, एक्शन, सस्पेंस और ड्रामा
MP Politics: एमपी बीजेपी की राजनीति में इन दिनों कई नाम चर्चित हैं। सबसे अमीर एमएलए संजय पाठक हाई कोर्ट के रूख तथा जनादेश दिखाने के जतन के कारण ताे डॉ. नराेत्तम मिश्रा दाेबारा सत्ता में वापसी के कयासों के कारण। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया का अशाेकनगर दाैरा अपने फिल्मी अंदाज के कारण सुर्खियाें में है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों अपने क्षेत्र में लगातार दौरे कर रहे हैं। चार दिनों के ये दौरे मसाला फिल्म की तरह एक्शन, सस्पेंस, ड्रामा से भरे हुए हैं। कहीं मनुहार है, कहीं फटकार, कहीं राजनीतिक चालें हैं तो कहीं शिकस्त के दांवपेंच।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अशोक नगर दौरे के दौरान अशोक नगर−पिपरई मार्ग पर नदी के पुल तथा कजराई में पंचायत भवन का लोकार्पण किया। बाद में पता चला कि इन दोनों कार्यों का लोकार्पण आठ आठ मार्च को सीएम मोहन यादव कर चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर विरोधी पूर्व सांसद केपी यादव मौजूद थे। एक कार्यक्रम का दो बार लोकार्पण होने पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। अशोक नगर के ही एक अन्य कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम के आगे श्रीमंत महाराज लिखा गया। इस पर नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष रीतेश जैन ने आपत्ति जता दी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कोशिश करते रहे हैं कि श्रीमंत व महाराज जैसे संबोधन वाली सामंती सोच से पीछा छूटे लेकिन यह हो नहीं पा रहा है।
एक तरफ, श्रीमंत की छवि तो दूसरी तरफ मेगा स्वास्थ्य शिविर में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कैंप में जो सेवा की, उसे देखकर मैं धन्य हो गया हूं। मैं जहां जाऊंगा, आपका भोंपू बजाऊंगा, मैं आपका झंडेदार और गाड़ी का हॉर्न भी बनूंगा।
अशोकनगर में ही आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से ही कलेक्टर साकेत मालवीय को फटकार लगा दी। हुआ यूं कि जनसुनवाई समाप्त होने के बाद नागरिकों के आवेदनों को इकट्ठा किया जा रहा था। कलेक्टर साकेत मालवीय आवेदनों को थैले में रखने लगे। आवेदनों को बिखरा हुआ देख केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तुरंत नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदें और विश्वास हैं। ये आवेदन नहीं, हमारे लिए सोना हैं। जनता के हर आवेदन को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालना चाहिए।
गौरतलब है कि कुछ साल पहले अशोकनगर में ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की जनसुनवाई में आवेदनों को फेंक देने का मामला सामने आया था। जैसे पहले उनके जाते ही काजू−बिस्किट की प्लेट पर लोग टूट पड़े थे वैसे ही इस बार भी सिंधिया के जाते ही लोग खाने पर टूट पड़े। इस कारण अफरा−तफरी की स्थिति बन गई। खाने की छिनाझपटी का वीडियो भी वायरल हुआ।
इस दौर में सस्पेंस का एंगल तब आया जब एक फरार आरोपी जनसुवाई में याचना लेकर पहुंच गया। फरार आरोपी दूसरे के नाम का टोकन लेकर शिकायत करने पहुंचा था। मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब नाम पूछा तो टोकन और आवेदक की पाेल खुल गई। पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया। इस तरह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दौरा मुख्य कार्य से अलग तरह−तरह के घटनाक्रम व वायरल वीडियाे के कारण सुर्खियों में छाया रहा।
जज साहब को गलती से फोन लगा, जनमत से बचाव
प्रदेश के सबसे अमीर विधायक संजय सत्येंद्र पाठक फिर चर्चा में हैं। उन पर कई तरह के मामले दर्ज हैं। अवैध खनन से जुड़े प्रकरण में उनके खिलाफ करोड़ों का जुर्माना लगाया है। इस मामले में हाईकोर्ट के एक जज को कॉल करने के आरोप में बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान संजय पाठक की ओर से कहा गया कि जज को कॉल लगना एक भूल थी और उनका कोई गलत इरादा नहीं था। उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताया। इस कॉल के पीछे किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप का उद्देश्य नहीं था। विधायक ने सुनवाई के दौरान बिना शर्त माफी भी मांगी, इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उन्हें तलब करते हुए 21 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।
इस मामले पर तो किरकिरी हुई ही है विधायक संजय पाठक एक अन्य मुद्दे पर खबर बन गए। अब विधायक संजय पाठक ने कहा है कि ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने पर वे जनता के पास जाएंगे तथा अपनी लोकप्रियता जांचेंगे। विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की तरह हर बूथ पर मतदान पेटी लगाकर जनता से वोट डालने की अपील की जाएगी। यदि उन्हें 51 फीसदी से कम समर्थन मिलेगा तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे।
इसके पहले 2023 में विधानसभा चुनाव के पहले भी वे अपनी विधानसभा में खुद के खर्च पर चुनाव करा चुके हैं, जिसमें उन्हें जीत मिली थी। इसी तर्ज पर वे वर्तमान कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने पर जनता के बीच जाकर मतदान करवाना चाहते हैं। यूं तो दोनों मामले अलग हैं लेकिन एक ही व्यक्ति से जुड़े हैं। इसलिए दोनों के बीच कनेक्शन देखा जाना स्वाभाविक है। इसे कोर्ट में जारी मामले पर हो रही किरकिरी को जनता के समर्थन के आंकड़ें से बौना कर देने की कवायद तरह देखा जा रहा है।
नरोत्तम मिश्रा के लिए सब उत्तम ही है?
पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में खुशी की लहर है। दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में तीन वर्ष की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म कर दी गर्इ है। अब दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने की अटकलें शुरू हो गई हैं। क्या बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को टिकट देगी और वे जीत जाएंगे। समर्थकों को गले−गले तक विश्वास है कि नरोत्तम मिश्रा ही जीतेंगे। एक अटकल और है कि राजेंद्र भारती के पास हाई कोर्ट में जाने का विकल्प है। संभव है उन्हें राहत मिल जाए। उप चुनाव हुआ तो भी उसमें समय लगेगा। इस स्थिति में समर्थक धैर्य नहीं रखना चाहते हैं। वे तो मान हैं कि संगठन रामनिवास रावत की तरह डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भी मंत्री बना कर सत्ता में लौटा लाए। बिना विधायक बने भी वे छह माह मंत्री रह सकते हैं।
दूसरी तरफ, प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं। चर्चा चल रही है कि यूजीसी अधिनियम से ब्राह्मणों की नाराजगी को देखते हुए राज्यसभा के लिए बीजेपी ब्राह्मण नेता को चुने। संगठन स्तर पर चर्चा है कि पूर्व गृहमंत्री को राज्यसभा भेजा सकता है, क्योंकि वे अंचल में ही नहीं प्रदेश में भी ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधि चेहरा माने जाते हैं। शीर्ष नेतृत्व डॉ. नरोत्तम मिश्रा से जुड़ी तमाम संभावनाओं पर विचार कर रहा हो या नहीं, मगर समर्थक हर संभावना में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को फिट मान रहे हैं। मंगलवार को प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात को उत्तम की आशा से ही देखा जा रहा है।
बीजेपी की मीडिया फौज, पहले अंदर लड़ाई फिर कांग्रेस की खिंचाई
एमपी बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी कार्यकारिणी को जितना छोटा रखा, मीडिया विभाग ने उसे सारे पैमाने तोड़ कर उतना ही बड़ा बना दिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 29 सदस्यीय छोटी टीम बनाई है। जबकि उनके मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बीजेपी मीडिया विभाग की टीम में 89 नेताओं को शामिल किया गया है। इसमें 33 प्रदेश प्रवक्ता, 41 मीडिया पैनलिस्ट और 9 प्रदेश सह मीडिया प्रभारियों के साथ 6 मीडिया विभाग के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
प्रवक्ताओं में 11 विधायकों को भी शामिल किया है। इनमें अर्चना चिटनीस और उषा ठाकुर जैसी वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, जो शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। इतनी बड़ी टीम से दो लक्ष्य साधे गए हैं। एक तो पद दे कर नेताओं की नाराजगी को कम करने का जतन किया गया है। दूसरा, हर तरह के, हर क्षेत्र के नेताओं को मीडिया विभाग में लेकर कांग्रेस पर तीखा व धारदार हमला बोलने की योजना को मूर्तरूप दिया गया है।
इस दृष्टिकोण से यह योजना ठीक है लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि जंबो टीम कांग्रेस पर हमले बाद में करेगी पहले तो वर्चस्व और दिखने का आंतरिक संघर्ष पहले होगा। अंदेशा है कि कौन कब बाइट देगा, किस चैनल में जाएगा, किस मुद्दे पर कौन प्रेस कांफ्रेंस करेगा जैसे सवाल हमेशा संघर्ष का कारण बनेंगे।




