जी भाईसाहब जी: फंस गए सीएम पर उंगली उठाने वाले बीजेपी एमएलए
आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय वही हैं जिन्होंने 2028 सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि के स्थाई अधिग्रहण को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
बीते कुछ समय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीतियों और उज्जैन में उन्हें प्रदान किए गए बंगले पर सवाल उठाने वाले बीजेपी एमएलए चिंतामणि मालवीय खुद महिला उत्पीड़न के आरोप में फंस गए।
बताया जाता है कि विक्रम विश्वविद्यालय से संबद्ध महिला प्रोफेसर ने विधायक चिंतामणि मालवीय के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत की थी। लंबे समय तक महिला की शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हुई तो महिला कांग्रेस आगे आ गई। महिला कांग्रेस ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को शिकायत करते हुए आरोपी विधायक पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की है। विधायक चिंतामणि मालवीय ने महिला शोषण के मामले को झूठा बताया है और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय वही हैं जिन्होंने 2028 सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि के स्थाई अधिग्रहण को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस आक्रामकता पर बीजेपी ने उन्हें नोटिस भी जारी किया था। हालांकि, यह मामला इतना बढ़ा कि सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।
बीते सप्ताह विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में बंगलों को खाली करवाने की बात आई तो सबसे ज्यादा चर्चा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय के बयान की हुई। उनके पास विश्वविद्यालय का ई-4 श्रेणी का आवास है और उन्हें भी इसे खाली करने का नोटिस मिला है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा है कि जब मुख्यमंत्री का आवास कुलपति के बंगले पर बना है, तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें भी आवास आवंटित किया जाना चाहिए। अपनी ही पार्टी में लड़ रहे आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय के लिए फिलहाल पुराना मामला फांस बन गया है। यह उनके राजनीतिक कदमों को भी तय करेगा।
तमिलनाडु की हार यहां पड़ गई भारी
भोपाल से करीब दो हजार किलोमीटर दूर तमिलनाडु में हुई एक हार ने एमपी के बीजेपी नेताओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में केन्द्र सरकार में मंत्री रहे एल. मुरुगन हार गए हैं। मुरुगन मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में खत्म होगा। मुरुगन अगर विधानसभा चुनाव जीत जाते तो उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जाती। इससे राज्यसभा सीट पर नजर जमाए मध्यप्रदेश के नेताओं को मौका मिल सकता था। मगर मुरुगन की हार एमपी बीजेपी नेताओं पर भारी पड़ी है। मुरुगन अब राज्यसभा में रहेंगे और इस कारण मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव चार सीट के लिए नहीं होगा। चार सीटों पर चुनाव होता तो स्थानीय नेताओं को ज्यादा सीट मिलने की संभावना थी। मुरुगन तो हार गए और उनकी हार ने यहां जीत की आस को धूमिल कर दिया।
छोटे मोटे बीजेपी विधायक को मंत्री पहचानते नहीं
विपक्ष और सत्ता पक्ष के कार्यकर्ता तो यह आरोप लगाते रहते हैं कि मंत्री उनकी सुनते नहीं हैं। मगर जब सत्ता पक्ष के विधायक यह आरोप लगाएं तो उनकी पीड़ा समझी जा सकती है। अपनी सरकार में सुनवाई न होने से आक्रोशित बीजेपी विधायक मथुरालाल डामर की पीड़ा अकेले में या मीडिया से बात में नहीं सार्वजनिक मंच से बया हो गई।
रतलाम विकास प्राधिकरण के नव नियुक्त पदाधिकारियों के पद ग्रहण कार्यक्रम में मंत्री चैतन्य कश्यप की उपस्थिति में विधायक मथुरा लाल डाबर ने खुल कर अपना दर्द कह सुनाया। उन्होंने कहा कि सड़क बनवाने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के पास जाओ तो वे अनदेखा कर देते हैं। कुछ दिनों के बाद उनके पीए आवेदन को फेंक देते हैं। अधिकारी बोलते हैं कि मुख्यमंत्री ए प्लस लिखेंगे तो आपका रोड बनेगा नहीं तो नहीं बनेगा। इस अनसुनी से दुखी बीजेपी विधायक मथुरालाल डाबर ने कहा कि दर्द होता है कि मैं विधायक हूं। बीजेपी के 165 विधायक हैं तो छोटे-मोटे विधायक को तो मंत्री पहचानते ही नहीं है। रतलाम ग्रामीण विधायक की ये सब बातें सुन कर मंच पर बैठे मंत्री चैतन्य काश्यप मुस्कुराते रहे।
सागर में करें शुद्धिकरण, कांग्रेस नेता का पत्र
सागर कांग्रेस की अंदरूनी घमासान खुलकर सामने आ गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री डॉ. नरेश चौबे द्वारा सागर शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेश जाटव को भेजा एक पत्र वायरल हो रहा है। कांग्रेस नेताओं को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा है कि सागर के कई नेता भोपाल–दिल्ली में अपने कांग्रेस नेताओं के खास हैं मगर सागर में ये सभी बीजेपी नेताओं के खास हैं। इनके बीजेपी नेताओं के साथ व्यापारिक संबंध भी हैं। ऐसे जयचंदों से कांग्रेसी पार्टी को नुकसान हो रहा है। विगत 35 वर्षों से सागर में महापौर, विधायक, सांसद कांग्रेस का नहीं है। क्योंकि कांग्रेस के नेता बीजेपी का काम करते हैं। अभी चुनाव में समय है, इसलिए शहर में कांग्रेस का शुद्धिकरण जरुरी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पत्र ने सागर की राजनीति में हलचल बड़ा दी है।




