वनाधिकार पट्टों की मांग को लेकर नेपानगर में आदिवासियों का प्रदर्शन, SDM कार्यालय के बाहर दिया धरना

नेपानगर में वनाधिकार पट्टे और सरकारी सुविधाओं की मांग को लेकर आदिवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। एसडीएम की गैरमौजूदगी से नाराज ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय घेरा।

Updated: Oct 30, 2026, 06:06 PM IST

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर में वनाधिकार पट्टे और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को आदिवासी समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। बाकड़ी, मांडवा और आसपास के गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रैली निकाली और एसडीएम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारी एसडीएम सृजन श्रीवास्तव से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताना चाहते थे लेकिन वे जन विश्वास शिविर में शामिल होने गए थे। उनकी अनुपस्थिति में तहसीलदार गजानन वास्कले ने ग्रामीणों से चर्चा की। हालांकि, प्रदर्शनकारी एसडीएम को ही ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े रहे। जिसके बाद स्थिति को देखते हुए कार्यालय परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया।

प्रदर्शन की शुरुआत नेहरू स्टेडियम मैदान से हुई थी। वहां अलग अलग गांवों के आदिवासी परिवार एकत्रित हुए। वहां से रैली के रूप में सभी एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि वनाधिकार अधिनियम के तहत पात्र होने के बावजूद कई परिवारों को अब तक जमीन के पट्टे नहीं दिए गए हैं। उनका आरोप है कि वन भूमि पर लंबे समय से काबिज होने के बावजूद उनके दावों को उचित तरीके से स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

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आदिवासी एकता संगठन के कार्यकर्ता रतन खरते ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर वन भूमि के लिए एक व्यक्ति को पट्टा जारी कर दिया गया। जबकि, उसी जमीन पर सालों से रह रहे दूसरे व्यक्ति को अधिकार नहीं मिला। खरते ने अधिकारियों से मांडवा और बाकड़ी गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संगठन मौके पर जांच कराने के लिए तैयार है। प्रशासन को गांव पहुंचकर दोनों पक्षों की स्थिति देखनी चाहिए। खरते ने स्पष्ट किया कि जब तक एसडीएम स्वयं आकर जवाब नहीं देते तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इसके लिए 10 दिन तक इंतजार करना पड़े तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे।

जागृत आदिवासी दलित संगठन की कार्यकर्ता आशा बाई जाधव ने आरोप लगाया कि वनाधिकार कानून के तहत कई परिवारों के दावे बिना उचित सत्यापन के निरस्त कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि पात्र होने के बावजूद लोगों को जमीन का अधिकार नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं ग्रामीणों को अपनी जमीन पर कुआं खोदने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। आशा बाई ने चेतावनी दी कि यदि एसडीएम खुद कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन नहीं लेते हैं तो प्रदर्शनकारी वहीं खाना बनाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे।

प्रदर्शन में शामिल अंतराम अवासे ने कहा कि वनाधिकार के पट्टे नहीं मिलने से आदिवासी परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित रह जाते हैं। उन्होंने जी राम जी योजना का लाभ पात्र आदिवासी परिवारों को दिए जाने की मांग की। अवासे ने वन विभाग पर ग्रामीणों की खेती से जुड़ी गतिविधियों में बाधा डालने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, आदिवासियों को वन भूमि पर ट्रैक्टर चलाने, बोवनी करने और सिंचाई के लिए पंप लगाने से रोका जाता है। कुआं खोदने की अनुमति नहीं मिलने से भी किसानों को परेशानी हो रही है।

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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि वनाधिकार अधिनियम के तहत लंबित और खारिज किए गए दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पात्र परिवारों को पट्टे दिए जाएं और वन भूमि पर खेती तथा अन्य जरूरी गतिविधियों को लेकर आ रही समस्याओं का समाधान किया जाए। फिलहाल ग्रामीण एसडीएम से मुलाकात और उनके सामने अपनी मांगें रखने पर अड़े हुए हैं।