चिटफंड कंपनी के 4 डायरेक्टर गिरफ्तार, फोरंसिक ऑडिट से कंपनियों के गुप्त निवेश और संपत्ति के खुलासे की तैयारी

चिटफंड के नाम पर लोगों से ठगी करने वालों पर कसा शिकंजा, सीएम ने आरोपियों पर सख्ती के दिए निर्देश, फोरेंसिक ऑडिट से होगा कंपनियों के निवेश का खुलासा, मुख्यमंत्री ने कहा जारी है एक युद्ध लुटेरों के विरुद्ध

Updated: Nov 26, 2021, 07:35 PM IST

चिटफंड कंपनी के 4 डायरेक्टर गिरफ्तार, फोरंसिक ऑडिट से कंपनियों के गुप्त निवेश और संपत्ति के खुलासे की तैयारी
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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार चिटफंड कंपनियों को नाकों चने चाबने की पूरी तैयारी में हैं। अब इन चिटफंड कंपनियों के  संचालकों को देशभर में खोज-खोज कर गिरफ्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चिटफंड कंपनी के 2 डायरेक्टर रायपुर से और 2 महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किए गए हैं। पुणे से गिरफ्तार आरोपियों ने लोगों से 21 करोड़ रुपए दोगुना करने के नाम पर जमा करवाए औऱ भाग खड़े हुए थे। पुलिस इनकी तलाश में लंबे समय से थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गोल्ड की इंफ्रावेंचर के डायरेक्टर धनेश कुमार वर्मा और गोवर्धन प्रसाद वर्मा के तौर पर हुई है, दोनों लंबे वक्त से फरार चल रहे थे। वहीं एक अन्य चिटफंड कंपनी बीएन गोल्ड के संचालक अनिल शर्मा और आनंद निर्मलकर को महाराष्ट्र से पकड़ा गया है। पुलिस इन्हें लेकर रायपुर आ गई है। इनकी गुप्त संपत्तियां उजागर की जाएंगी। सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। ताकि इनसे ठगाए गए लोगों को उनकी डूबी हुई रकम लौटाई जा सके। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन कंपनी संचालकों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले बालोदाबाजार से पुलिस ने एक कंपनी संचालक को गिरफ्तार किया था, आरोपी की  कंपनी ने 11 हजार 930 लोगों को निवेश करवाया और कंपनी बंद कर फरार हो गया। उसने निवेशकों से 28 करोड़ रुपए की ठगी की थी। अब इन चिटफंड कंपनियों के संचालकों की गुप्त प्रॉपर्टी का पता लगातार उन्हें उजागर करने की तैयारी है।छत्तीसगढ़ सरकार इन चिटफंड कंपनियों की प्रॉपर्टी नीलाम और कुर्क करके लोगों के पैसे लौटा रही है।वहीं खबर है कि पुलिस फोरेंसिक ऑडिट करने की तैयारी में हैं। जिससे इन चिटफंड कंपनियों की गुप्त प्रॉपर्टी और शैल कंपनियों के इन्वेस्टमेंट का पता लगाया जा सके।

फोरेंसिक ऑडिट के जरिए पुलिस पता लगा सकेगी कि इन चिटफंड कंपनियों ने लोगों के पैसे शैल कंपनियों में इनवेस्ट किए हैं। जिससे उस राशि और संपत्ति की जानकारी नहीं चल पा रही है। माना जा  रहा है कि यह पहला मौका है जब किसी का फोरेंसिक ऑडिट किया जाएगा। फोरंसिक ऑडिट वैज्ञानिक और हाइटेक होता है, जिससे किसी के द्वारा किए गए फंड ट्रांसफर और निवेश जैसी चीजों का खुलासा किया जा सकता है।

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लोगों की गाढ़ी कमाई लेकर फरार होने वाले कंपनियों और डायरेक्टरों के खातों के साथ-साथ उनके रिश्तेदारों दोस्तों और करीबियों के अकाउंट्स का भी ऑडिट होगा।  जिससे पता लगया जा सके कि कब, क्यों और कैसे इन खातों में पैसा आया, वहीं इनका निवेश  किन खातों या कंपनियों किया गया। दरअसल सरकार इन कंपनियों के निवेश और संपत्ति की कुर्की करके लोगों के पैसे लौटा रही है। राजनांदगांव जिले में अब तक करीब 9 करोड़ से ज्यादा की रकम लोगों को लौटाई गई है।