दुर्ग में 185 फर्जी राशनकार्ड मामले में थाने में FIR दर्ज

दुर्ग फूड कंट्रोलर की आईडी हैक, आरोपी ने 185 फर्जी राशन कार्ड बनाए, 57 राशकार्ड धारियों ने निकाला अनाज तब हुआ मामले का खुलासा विभागीय जांच के बाद केस दर्ज, 8 जून तक 80 हजार से ज्यादा का अनाज निकाला गया

Updated: Jun 24, 2021, 06:03 PM IST

दुर्ग में 185 फर्जी राशनकार्ड मामले में थाने में FIR दर्ज
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रायपुर। दुर्ग जिले में फर्जी राशन कार्ड बनाने का मामला सामने आया है, दुर्ग जिला खाद्य नियंत्रक की आईडी हैक कर विभागीय माड्यूल से करीब 185 फर्जी राशन कार्ड बनाए गए हैं। जिसकी शिकायत विभाग की ओर से कोतवाली थाने में की है। इन फर्जी राशनकार्ड धारियों में से 57 लोगों ने विभिन्न स्थानों से राशन भी लिया है। राशनकार्ड धारियों द्वारा राशन लेने के बाद मामले का खुलासा हुआ। खाद्य निरीक्षक ने गड़बड़ी होने पर विभाग को सूचित किया जिसके बाद विभागीय जांच के बाद मामला पुलिस में दर्ज करवाया गया है। फर्जी राशन कार्ड बनाने और फूड कंट्रोलर की आईडी पासवर्ड हैक होने के मामले में कई कोटेदार, दलाल और विभागीय अधिकारी भी शक के घेरे में है। 

हैरानी की बात तो है कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी आईडी से राशन कार्ड बनते रहे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। संबधित अफसर इस बात से बेखबर रहे कि कोई दूसरा उनकी आईडी से राशन कार्ड जारी कर रहा है। हद तो तब हो गई जब फर्जी राशन कार्ड में से करीब 57 फर्जी राशन कार्डों धारियों ने बाकायदा अनाज भी ले लिया। दरअसल फर्जी तरीके से 44 अंत्योदय और 141 अन्य श्रेणी के राशन कार्ड बने हैं। राशन कार्ड बनाने के लिए विभागीय आइडी, पासवर्ड और माड्यूल का इस्तेमाल किया गया है।

 

ये फर्जी राशन कार्ड जनपद पंचायत धमधा, पाटन, दुर्ग और भिलाई निगम के साथ भिलाई चरोदा निगम की राशन दुकानों से जुड़े हैं। इन राशन कार्डों से आठ जून 2021 तक 80 हजार 335 रुपये का खाद्यान्न लिया गया है।  

जब इन फर्जी राशन कार्डों से खाद्यान्न का आहरण किया गया तब जाकर निरीक्षक को इसका पता चला। निरीक्षक ने इस मामले की जांच विभागीय स्तर पर करवाई जिसके बाद इस 185 फर्जी राशनकार्ड बनाए जाने और आईडी हैक होने की शिकायत थाने में दर्ज करवा दी गई। कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

 यह पहला मामला नहीं है जब छत्तीसगढ़ में फर्जी राशनकार्डों का खुलासा हुआ है, इससे पहले भी बड़ी संख्या में फर्जी राशन कार्ड बनने की शिकायतें मिलती रही हैं। साल 2013 और 2016 के बीच 14 लाख से भी ज्यादा फर्जी कार्ड बनाने की शिकायत दर्ज हुई थी।  

छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड के माध्यम हितग्रहियों को राशन का वितरण किया जाता है। कोरोना की वजह से राशन कार्ड धारकों को मुफ्त में दो महीने का राशन दिया किया जा रहा है। जो कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से लाभार्थी परिवारों मिल रहा है। परिवार के सदस्य को 5 किलो राशन मिलता है। आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी परिवारों को यह लाभ प्रदान किया जाता है।

 वहीं राशन कार्ड के माध्यम से गरीबी रेखा ने नीचे के लोगों को नागरिकों को 1 रूपए मूल्य की दर से 35 किलोग्राम राशन प्रदान किया जाता है। अब 185 फर्जी राशनकार्ड बनने औऱ बड़ी मात्रा में फर्जी लोगों द्वारा अनाज लेने से विभाग में हड़कंप मच गया है।