ट्रंप के टैरिफ ऐलान पर यूरोपियन यूनियन का पलटवार, अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर लगाई रोक

ग्रीनलैंड मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बाद यूरोपीय संघ ने सख्त कदम उठाया है। EU ने अमेरिका के साथ हुए ट्रांसअटलांटिक व्यापार समझौते की मंजूरी रोक दी है।

Updated: Jan 18, 2026, 01:30 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के तुरंत बाद यूरोपीय संघ (EU) ने कड़ा रुख अपनाया है। ग्रीनलैंड को लेकर दबाव बनाने के लिए लगाए गए नए टैरिफ के जवाब में EU ने अमेरिका के साथ हुए ट्रांसअटलांटिक व्यापार समझौते की मंजूरी प्रक्रिया को रोक दिया है। यूरोपीय संसद के वरिष्ठ सांसदों ने साफ किया है कि बदले हुए हालात में इस डील को आगे बढ़ाना फिलहाल संभव नहीं है। 

ट्रंप ने बीते 17 जनवरी 2026 को ऐलान किया था कि 1 फरवरी से नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों के सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर पूरी तरह खरीदने की डील नहीं मिली तो जून से यही टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इस घोषणा को यूरोप में सीधे तौर पर राजनीतिक दबाव और आर्थिक धमकी के रूप में देखा गया।

टैरिफ लागू करने के इस कदम के बाद यूरोपीय संघ ने प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर ब्रेक लगा दिया। यूरोपीय संसद के सबसे बड़े राजनीतिक समूह यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि उनकी पार्टी EU–US ट्रेड डील का समर्थन करती है लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों के चलते इस समय इसे मंजूरी देना राजनीतिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी उत्पादों पर EU द्वारा टैरिफ घटाने या खत्म करने की योजना को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है।

यह व्यापार समझौता पिछले साल जुलाई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुआ था। इसके तहत अमेरिका ने ज्यादातर यूरोपीय सामान पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर सहमति दी थी। जबकि, बदले में EU ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ कृषि सामान पर शुल्क खत्म करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बढ़ते व्यापार तनाव को टालना था। समझौते का एक हिस्सा लागू हो चुका है लेकिन इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए यूरोपीय संसद की मंजूरी जरूरी थी जो फिलहाल अटक गई है।

यूरोपीय संसद के सदस्य सिगफ्रीड मुरेशान ने कहा कि पिछले जुलाई में संसद इस डील को मंजूरी देने के करीब थी और इसके बाद यूरोपीय संघ में अमेरिकी आयात पर टैरिफ शून्य किया जाना था। हालांकि, नए टैरिफ तनाव ने उस राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया है जिसमें यह मंजूरी दी जानी थी।

ट्रंप के इस फैसले पर यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया भी तीखी रही। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ऐसे टैरिफ ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करते हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे अस्वीकार्य बताया। यूरोपीय संसद की ट्रेड कमेटी के चेयर बर्न्ड लांगे ने कहा कि देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर EU को अपने एंटी कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। जिसके तहत जवाबी टैरिफ, टैक्स और निवेश से जुड़े सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

डेनमार्क के एमईपी पेर क्लाउसेन ने भी 30 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ मांग की है कि जब तक ग्रीनलैंड को लेकर धमकियां जारी हैं। तब तक EU–US ट्रेड डील को फ्रीज रखा जाए। इसी बीच EU के 27 देशों के राजदूत इस मुद्दे पर आपात बैठक करने वाले हैं।