रात 12 से सुबह 6 बजे तक नहीं चलेगा Instagram और Facebook, बच्चों के लिए Meta ने सख्त किए नियम

Meta ने अमेरिका में नाबालिगों की सोशल मीडिया सुरक्षा के लिए डिजिटल बेडटाइम फीचर का ट्रायल शुरू किया है। जिसके तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बच्चों की सोशल मीडिया एक्सेस पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाएगी।

Updated: Aug 28, 2026, 12:17 AM IST

सोशल मीडिया पर बच्चों और किशोरों की बढ़ती सक्रियता और लंबे स्क्रीन टाइम को देखते हुए मेरा अपने प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक में बड़े बदलाव करने जा रहा है। कंपनी ने डिजिटल बेडटाइम फीचर का ट्रायल शुरू किया है। जिसके तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बच्चों की सोशल मीडिया एक्सेस पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा रात और स्कूल के समय नोटिफिकेशन भी सीमित किए जाएंगे।

मेटा की नई नीति का फोकस खास तौर पर नाबालिग यूजर्स के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने और उन्हें ऑनलाइन नुकसान से बचाने पर है। कंपनी की योजना के तहत नाबालिगों की पोस्ट पर मिलने वाले लाइक और रिएक्शन की संख्या को छिपाया जाएगा। इससे सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और लगातार एंगेजमेंट हासिल करने का दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी।

कंपनी बच्चों और किशोरों के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े फिल्टर पर भी रोक लगाएगी। साथ ही उम्र की पुष्टि करने वाले सिस्टम यानी एज अश्योरेंस और पेरेंटल कंट्रोल को मजबूत किया जाएगा। मेटा अपने प्लेटफॉर्म के इनफिनिट स्क्रॉल अनुभव में भी बदलाव करने की तैयारी में है। ताकि यूजर्स लगातार कंटेंट देखते रहने के बजाय ब्रेक लें।

टीनएजर्स को सोशल मीडिया फीड को लेकर भी एक नया विकल्प दिया जाएगा। वे एल्गोरिदम से व्यक्तिगत पसंद के आधार पर तैयार की गई फीड के बजाय नॉन पर्सनलाइज्ड फीड चुन सकेंगे। अभी प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम यूजर की गतिविधियों और रुचियों का अनुमान लगाकर कंटेंट दिखाता है। जिसका एक प्रमुख उद्देश्य यूजर्स की एंगेजमेंट बढ़ाना है।

इन बदलावों के जरिए मेटा की नीति में एक अहम बदलाव दिखाई दे रहा है। जिस प्लेटफॉर्म मॉडल पर लंबे समय तक यूजर्स को ज्यादा से ज्यादा समय तक ऐप पर बनाए रखने पर जोर रहा अब उसी में बच्चों के सोने और पढ़ाई के समय सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करने की व्यवस्था की जा रही है।

मेटा ने अपनी सेफ्टी नीतियों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र ऑडिटर की ओर से कंप्लायंस मॉनिटरिंग पर भी सहमति जताई है। कंपनी अब अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर ऐसे दावे नहीं करेगी जो लोगों को गुमराह कर सकते हैं। सेफ्टी से संबंधित जानकारी यूजर्स को वास्तविक स्थिति के आधार पर देने की बात कही गई है।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस पूरे मामले में मेटा को बड़ी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। शुरुआत में कंपनी से करीब 12.7 अरब डॉलर के भुगतान की उम्मीद है। जबकि, कुल रकम 17.1 अरब डॉलर तक जा सकती है। यह राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि टिकटॉक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के उपाय अपनाते हैं और भुगतान में योगदान करते हैं या नहीं।

17.1 अरब डॉलर भारतीय मुद्रा में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। हालांकि, मेटा के नजरिए से यह रकम कंपनी के कुल कारोबार की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। कंपनी ने 2025 में करीब 201 अरब डॉलर का रेवेन्यू रिपोर्ट किया था।

मेटा की मौजूदा नीतियों के पीछे अमेरिका में चल रहा बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा कानूनी विवाद भी महत्वपूर्ण है। साल 2023 में अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने फेडरल कोर्ट में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि फेसबुक और इंस्टग्राम को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और टीनएजर्स इन प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय तक सक्रिय रहें।

राज्यों ने दावा किया था कि मेटा को अपने प्रोडक्ट्स से बच्चों और किशोरों को होने वाले संभावित मानसिक और शारीरिक नुकसान की जानकारी थी। इसके बावजूद कंपनी पर माता-पिता और आम लोगों को इन जोखिमों के बारे में गुमराह करने का आरोप लगाया गया। मेटा पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों से माता-पिता की उचित सहमति के बिना उनकी जानकारी जुटाने के जरिए संघीय बाल-गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया गया था।

शुरुआत में यह मुकदमा दोनों राजनीतिक दलों से जुड़े राज्यों के गठबंधन के साथ सामने आया था। बाद में मामला बढ़कर 47 राज्यों, US कैपिटल और कई अमेरिकी क्षेत्रों को शामिल करने वाले बड़े सेटलमेंट में बदल गया।

इस मामले की सुनवाई 18 अगस्त से शुरू हुई है। मेटा के पूर्व सेफ्टी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की अदालत में हुई गवाही ने कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी। बेजार ने कहा कि उन्होंने युवा यूजर्स को प्रभावित करने वाले नुकसानदायक ऑनलाइन अनुभवों को लेकर कंपनी के भीतर चिंता जताई थी।

उनके मुताबिक, मेटा के भीतर सेफ्टी की तुलना में एंगेजमेंट और ग्रोथ को अधिक प्राथमिकता दिए जाने की समस्या थी। उनकी गवाही से यह सवाल भी उठा कि कंपनी को बच्चों और किशोरों पर अपने प्लेटफॉर्म के संभावित प्रभावों की जानकारी होने के बावजूद उसने उनके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों को कितनी प्राथमिकता दी।

अब डिजिटल बेडटाइम, सीमित नोटिफिकेशन, छिपे हुए लाइक-काउंट, मजबूत पेरेंटल कंट्रोल और नॉन पर्सनलाइज्ड फीड जैसे बदलावों के जरिए मेटा बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह बदलाव उस पुराने मॉडल से अलग संकेत देता है। जिसमें यूजर्स की एंगेजमेंट बढ़ाना प्लेटफॉर्म की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।