महंगी हुई चीनी तो खरीद पर भी लगी लिमिट, Blinkit और Zepto पर 5 किलो से ज्यादा नहीं मिलेगा
त्योहारों से पहले चीनी की कीमतें बढ़कर 65 रुपए किलो पहुंच गई हैं। जमाखोरी रोकने के लिए ब्लिंकइट, जेप्टो और डीमार्ट ने प्रति ग्राहक 2 से 5 किलो चीनी की बिक्री सीमा तय कर दी है।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। देश में सप्लाई पर दबाव के बीच क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट और जेप्टो ने एक ग्राहक के लिए चीनी की खरीदारी सीमित कर दी है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक बार में करीब 2 से 5 किलो तक ही चीनी खरीदी जा सकेगी। वहीं, डीमार्ट और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े रिटेल स्टोर भी प्रति ग्राहक 2 से 3 किलो तक की सीमा तय कर चुके हैं।
उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 65.05 रुपए प्रति किलो पहुंच गया। 26 जुलाई को यह कीमत 48 रुपए किलो थी। यानी सिर्फ एक महीने में चीनी करीब 35.5 फीसदी महंगी हो गई है। थोक बाजार में भी भाव 45 रुपए से बढ़कर 60.36 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। PIB के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच थोक कीमतों में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी और इसके बाद भी तेजी जारी रही।
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रिटेल बाजार में खरीदारी की सीमा लगाने का प्रमुख कारण जमाखोरी रोकना और उपलब्ध स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाना बताया जा रहा है। चीनी के एक प्रमुख ब्रांड के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खुदरा विक्रेता यह कदम इसलिए उठा रहे हैं ताकि कुछ ग्राहक बड़ी मात्रा में खरीदकर स्टॉक जमा न कर लें और बाजार में उपलब्ध चीनी सभी उपभोक्ताओं को मिल सके।
कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारी मांग बढ़ने वाली है। रक्षाबंधन के बाद गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहार आने हैं। इस दौरान मिठाइयों और चीनी से बनने वाले व्यंजनों की खपत बढ़ती है। ऐसे में एक महीने के भीतर करीब 17 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी सीधे तौर पर परिवारों के राशन बजट को प्रभावित कर सकती है।
चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव की एक बड़ी वजह अगले मार्केटिंग सीजन में उत्पादन का अनुमान भी है। इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश का चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है।
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दूसरी ओर देश में चीनी की सालाना घरेलू खपत लगभग 280 लाख टन है। सीजन की शुरुआत में करीब 50 लाख टन का ओपनिंग स्टॉक मौजूद था लेकिन घरेलू खपत की तुलना में नया उत्पादन कम रहने की आशंका ने सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है। ISMA के अनुसार, सितंबर के अंत तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन तक सिमट सकता है। कम स्टॉक की आशंका ने बाजार में कीमतों को और बढ़ावा दिया है।
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन चीनी के आयात को मंजूरी दी है। इसके साथ ही आयात पर टैक्स हटाने का फैसला किया गया है ताकि घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचाई जा सके। सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए राज्यों को बाजारों में निगरानी और जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। व्यापारियों और डीलरों के स्टॉक पर भी नियंत्रण लागू किया गया है। नए नियमों के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा की खपत का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
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इसके अलावा डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन तक की स्टॉक लिमिट निर्धारित की गई है। घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए चीनी के निर्यात पर भी 30 सितंबर 2026 तक रोक लगाई गई है। सरकार के इन कदमों का मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना, जमाखोरी पर अंकुश लगाना और त्योहारी सीजन में कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। हालांकि, फिलहाल उपभोक्ताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में सीमित मात्रा में ही चीनी खरीदने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।




