MP में 6 वर्ष में 2.70 लाख महिलाएं और बच्चियां लापता, 50 हजार से ज्यादा का अब तक सुराग नहीं

एमपी विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 2020 से जनवरी 2026 तक प्रदेश की 2,70,300 महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। इनमें से 50,170 का अब तक सुराग नहीं मिला।

Publish: Feb 20, 2026, 06:45 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में महिलाओं और बालिकाओं के लापता होने को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने सियासी हलकों से लेकर आम जनता तक को झकझोर कर रख दिया है। गृह विभाग ने कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के प्रश्न के लिखित उत्तर में खुलासा किया है कि साल 2020 से 28 जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 2,70,300 महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। इनमें से 2,20,130 को खोज कर लिया गया है लेकिन अब भी 50,170 महिलाएं और बालिकाएं ऐसी हैं जिनका कोई पता नहीं चल सका है।

विधानसभा में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, इस अवधि में 2,06,507 महिलाएं लापता हुई जिनमें से 1,58,523 को खोज लिया गया। जबकि, 47,984 महिलाएं अब भी लापता हैं। इसी तरह 63,793 बालिकाएं गुमशुदा हुई हैं। जिनमें से 61,607 को खोज लिया गया है लेकिन 2,186 बालिकाओं का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। कुल मिलाकर 50 हजार से अधिक मामलों का लंबित रहना चिंता का विषय बन गया है।

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साल-दर-साल के आंकड़े भी बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं। साल 2020 में 31,405 महिलाएं और लड़कियां लापता हुई थी। यह संख्या 2021 में बढ़कर 39,564 हो गई थी। 2022 में 43,148 और 2023 में 46,291 मामले सामने आए थे। वहीं, 2024 में यह आंकड़ा 50,798 तक पहुंच गया था। जबकि, 2025 में 54,897 महिलाएं और बालिकाएं लापता हुई थी। साल 2026 में केवल 28 जनवरी तक ही 4,197 नए मामले दर्ज हो चुके हैं। इन लगातार बढ़ते आंकड़ों ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इन तथ्यों के सामने आने के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह आंकड़े प्रदेश में महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के लापता होने के पीछे कहीं कोई संगठित गिरोह तो नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जिला स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए और विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए।

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दूसरी तरफ महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस आंकड़े की जानकारी नहीं है और वे मामले की स्थिति की जांच कराएंगी। जब उन्हें बताया गया कि यह आंकड़े स्वयं सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किए गए हैं तब उन्होंने कहा कि वह पूरे प्रकरण को देखेंगी। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जहां भी ऐसे मामले सामने आते हैं वहां कार्रवाई करती है और महिलाओं के हित में विभिन्न योजनाएं भी चला रही है। उन्होंने लाड़ली बहनों और महिलाओं के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की बात भी दोहराई।

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